किशोरावस्था मानव जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण काल है। कवियों ने इसे मानव जीवन का वसंत तथा समग्र जीवनकाल का एक महत्वपूर्ण काल बताया है। 'एडोलेसेंस' (adolescence) शब्द ग्रीक शब्द 'एडोलेसेरे' (adolescere) से व्युत्पन्न है जिसका अर्थ है "परिपक्वता की ओर बढ़ना"।
मनोवैज्ञानिकों ने समय-समय पर इसकी अनेक परिभाषाएँ दी हैं। कुछ मनोवैज्ञानिक इसे जीवन का संक्रमण काल कहते हैं।
इस संक्रमण काल में बालक अनेक परिवर्तनों का अनुभव करता है। यह काल बाल्यावस्था एवं प्रौढ़ावस्था के बीच का काल है। कभी-कभी इसे किशोरावस्था कहा जाता है।
ए.टी. जर्सिल्ड (A.T. Jersild) के अनुसार, "किशोरावस्था वह काल है जब बालक एवं बालिकाएँ मानसिक, संवेगात्मक, सामाजिक तथा शारीरिक रूप से बाल्यावस्था से प्रौढ़ावस्था की ओर बढ़ते हैं।" कालानुक्रम की दृष्टि से किशोरावस्था स्थूल रूप से 12 वर्ष से लगभग 20 वर्ष के आरंभ तक का काल है। किशोरावस्था का आरंभ देश की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर संस्कृति-दर-संस्कृति भिन्न होता है। इस काल में व्यक्ति समस्त विकासात्मक आयामों में महत्वपूर्ण परिवर्तनों से गुज़रता है।
ए. टी. जर्सिल्ड की किशोरावस्था की परिभाषा निम्नलिखित पर बल देती है:
जर्सिल्ड बाल्यावस्था से वयस्कता तक वृद्धि पर बल देते हैं, अतः यही उत्तर है।
उनकी परिभाषा मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और शारीरिक परिवर्तन का नाम लेती है।
यह किशोरावस्था को वयस्कता की ओर संक्रमण के रूप में देखती है।
पाठ ठीक यही विचार उद्धृत करता है।
अन्य विकल्प उनकी परिभाषा का भाग नहीं हैं।
अतः पहला विकल्प सही है।
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