न्याय दर्शन के अनुसार, धुएँ के प्रत्यक्ष से अग्नि का अनुमान करने की अनुमान प्रक्रिया में निम्नलिखित में से कौन-से कथन शामिल हैं? नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
1.पर्वत पर अग्नि है (प्रतिज्ञा)।
2.क्योंकि उसमें धुआँ है (हेतु)।
3.जहाँ अग्नि है वहाँ धुआँ है, जैसे रसोई में (उदाहरण)।
4.धुएँ से भरे पर्वत में अवश्य अग्नि होगी (उपनय)।
5.अतः पर्वत पर अग्नि है (निगमन)।
Aकेवल 1, 2, 3
Bकेवल 1, 2, 4, 5 ✓ Correct
Cकेवल 3, 4, 5
Dकेवल 1, 2
Correct answer: (B) केवल 1, 2, 4, 5
Explanation
धुएँ से अग्नि का वैध अनुमान यहाँ सही ढंग से कहे गए चार अवयवों पर टिका है: प्रतिज्ञा, हेतु, उपनय और निगमन।
कथन 1 प्रतिज्ञा कहता है कि पर्वत पर अग्नि है।
कथन 2 हेतु देता है, अर्थात् धुएँ की उपस्थिति।
कथन 4 व्याप्ति को इस स्थिति पर लागू करता है (उपनय) और कथन 5 निष्कर्ष (निगमन) निकालता है।
कथन 3 व्याप्ति को ग़लत रूप में "जहाँ अग्नि है वहाँ धुआँ है" कहता है, जबकि सही नियम है कि जहाँ धुआँ है वहाँ अग्नि है।
इसका उदाहरण अविनाभाव (invariable concomitance) की ग़लत दिशा रखता है, अतः केवल कथन 1, 2, 4 और 5 ही सही अनुमान के अंग हैं।
Want more like this? Create a free account to practise a full test, track your progress, and get spaced-repetition review.
Practise on Mcqkart →🎓 Book an expert →