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विभिन्न मूर्खतापूर्ण मतों, जिसकी ओर मनुष्य प्रवृत्त है, से बचने के लिए किसी अतिमानवीय मस्तिष्क की आवश्यकता नहीं है। कुछ सामान्य नियम, सभी त्रुटियों से नहीं, अपितु मूर्खतापूर्ण त्रुटियों से आपको मुक्त रखेंगे। यदि कोई मसला जिसे प्रेक्षण द्वारा सुलझाया जा सकता हो, तो आप स्वयं ही प्रेक्षण कर सकते हैं।

अरस्तू चिंतन की इस भूल से बच सकते थे कि महिलाओं में पुरूषों की अपेक्षा कम दाँत होते हैं, उसकी सरल युक्ति यह थी कि वह श्रीमती अरस्तू को मुंह खोलने के लिए कहते और उनके दाँत गिन लेते। यह सोचना कि आप जानते हैं जब कि वास्तव में आप जान नहीं रहे होते, यह एक खराब गलती है, जिसकी ओर हम सभी प्रवृत्त हैं।

मेरा स्वयं का विश्वास है कि साही काले भृंगों को खाती है, क्योंकि मुझे ऐसा बताया गया है ; किन्तु यदि मैं साहियों की आदत पर कोई पुस्तक लिखूँ तो, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए उस समय तक जब तक मैं किसी को इस आहार का भक्षण करते हुए न पाऊँ। तथापि अरस्तू कम सतर्क थे। प्राचीन और मध्यकालीन लेखक एक युनिकार्न और सैलमैंडर के बारे में सब कुछ जानते हैं, उनमें से किसी ने भी उनके बारे में हठधर्मी कथन से बचना आवश्यक नहीं माना क्योंकि उन्होंने उनमें से किसी को कभी नहीं देखा था।

लेखक के अनुसार किसी मसले को कैसे सुलझाया जा सकता है।

Aलोगों के अनुभव के द्वारा
Bस्वयं निरीक्षण कर के ✓ Correct
Cकिताबों को पढ कर
Dहठधर्मी कथनों का अनुसरण कर के
Correct answer: (B) स्वयं निरीक्षण कर के
Explanation

लेखक का नियम स्पष्ट है, यदि किसी मसले को प्रेक्षण से सुलझाया जा सकता है तो स्वयं प्रेक्षण कीजिए। अतः मसला स्वयं निरीक्षण करके सुलझता है।

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