अपने सर्वाधिक व्यापक अर्थ में स्व-निर्देशित अधिगम उस प्रक्रिया का वर्णन करता है जिसमें व्यक्ति अपनी अधिगम आवश्यकताओं के निदान, अधिगम लक्ष्यों के निरूपण, अधिगम हेतु संसाधनों की पहचान करने, अधिगम रणनीतियों के चयन व कार्यान्वयन और अधिगम परिणामों के मूल्यांकन में दूसरों की सहायता से अथवा उसके बिना पहल करते हैं। अत: उसके शोध जीवन के लिए सरलता पूर्वक व कुशलता से नया ज्ञान प्राप्त करना महत्त्वपूर्ण है।
स्व-निर्देशित अधिगम की क्या आवश्यकता है? एक कारण तो यह है कि इसके विश्वास योग्य साक्ष्य हैं कि जो व्यक्ति अधिगम में पहल करते हैं वे सिखाए जाने की प्रतीक्षा में लगे लोगों की अपेक्षा अधिक और उत्तम अधिगम प्राप्त करते हैं, दूसरा कारण है कि स्व-निर्देशित अधिगम मनोवैज्ञानिक विकास की हमारी प्रक्रियाओं के अधिक अनुरूप है; परिपक्वन का एक अनिवार्य पक्ष है अधिकाधिक स्व-निर्देशित बनने हेतु, हमारे अपने जीवन का अधिकाधिक उत्तरदायित्व लेने की सामर्थ्य विकसित करना।
तीसरा कारण है कि शिक्षा में अनेक नए विकास शिक्षार्थियों के अपने स्वयं के अधिगम में उन पर अत्यधिक पहल करने का भारी दायित्व डालते हैं। आज के अनुदेशात्मक पर्यावरण की चुनौतियों का सामना करने हेतु स्व-निर्देशित अधिगम सर्वाधिक अनिवार्य है।
लेखक के अनुसार, आधुनिक पर्यावरण
गद्यांश अंत में आज के अनुदेशात्मक पर्यावरण की चुनौतियों की बात करता है। अतः लेखक के अनुसार आधुनिक पर्यावरण अनुदेशी है।
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