शास्त्रीय भारतीय तर्कशास्त्र (न्याय) के अनुसार, तर्क 'शब्द नित्य है क्योंकि वह उत्पन्न होता है' दोषपूर्ण है क्योंकि:
Aमध्य पद, बड़े पद की उपस्थिति से व्याप्त होने के बजाय, उसके अभाव से व्याप्त है। ✓ Correct
Bमध्य पद का आश्रय असंभव है।
Cमध्य पद, बड़े पद के अभाव से व्याप्त होने के बजाय, उसकी उपस्थिति से व्याप्त है।
Dइसमें कोई बड़ा पद नहीं है।
Correct answer: (A) मध्य पद, बड़े पद की उपस्थिति से व्याप्त होने के बजाय, उसके अभाव से व्याप्त है।
Explanation
यह तर्क इसलिए विफल है क्योंकि इसका मध्य पद बड़े पद की उपस्थिति से नहीं, बल्कि उसके अभाव से व्याप्त है।
शब्द के नित्य होने का दावा इस आधार पर है कि शब्द उत्पन्न होता है।
उत्पन्न होना अनिवार्यतः अनित्यता से जुड़ा है, जो अभीष्ट निष्कर्ष के विपरीत है।
अतः हेतु जहाँ भी होता है वहाँ नित्यता के अभाव के साथ रहता है।
बड़े पद के अभाव के साथ सहवर्ती मध्य पद विपरीत को सिद्ध करता है।
यह विरुद्ध, अर्थात् न्याय का विरोधी हेत्वाभास है।
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