McqkartGet appPractise

चिंतनशील मूल्यांकन सापेक्ष महत्व के संबंध में तर्क की माँग करता है, केवल गणना की नहीं। यह एक ऐसा कार्य है जिसमें हम निरंतर लगे रहते हैं। उस सामान्य समझ में सार्वजनिक तर्क के संभावित महत्व को जोड़ना होगा, जो मूल्यांकनों की पहुँच और विश्वसनीयता बढ़ाने और उन्हें अधिक सुदृढ़ बनाने का एक तरीका है।

जाँच और आलोचनात्मक आकलन की आवश्यकता केवल एकांत में रहने वाले व्यक्तियों द्वारा आत्म-केंद्रित मूल्यांकन की माँग नहीं है, बल्कि सार्वजनिक चर्चा और अन्योन्यक्रियात्मक सार्वजनिक तर्क की उपयोगिता का संकेत है। यदि सामाजिक मूल्यांकन पूर्णतः पृथक और एकांतबद्ध चिंतन पर आधारित हों तो वे उपयोगी सूचना और अच्छे तर्कों से वंचित रह सकते हैं। सार्वजनिक चर्चा और विचार-विमर्श विशेष कार्यप्रणालियों और उनके संयोजनों की भूमिका, पहुँच और महत्व की बेहतर समझ की ओर ले जा सकते हैं।

उदाहरण के लिए, भारत में लिंग-आधारित असमानताओं की सार्वजनिक चर्चा ने हाल के वर्षों में कुछ ऐसी स्वतंत्रताओं का महत्व उजागर करने में मदद की है जिन्हें पहले पर्याप्त मान्यता नहीं मिली थी। उदाहरणों में उन निश्चित और परंपरागत पारिवारिक भूमिकाओं से हटने की स्वतंत्रता शामिल है जो महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक अवसरों को सीमित करती हैं।

सुस्थापित, पुरुष-प्रधान समाजों में लिंग असमानता के ये परंपरागत पूर्ववर्ती न केवल व्यक्तिगत चिंता बल्कि सूचनात्मक सार्वजनिक चर्चा और प्रायः आंदोलन की भी माँग करते हैं। सार्वजनिक तर्क तथा सामाजिक आकलन में क्षमताओं के चयन और भारांकन के बीच संबंध पर बल देना महत्वपूर्ण है। यह उस तर्क की असंगति की ओर भी संकेत करता है, जो कभी-कभी प्रस्तुत किया जाता है, जो दावा करता है कि विशिष्ट कार्यप्रणालियों पर भार किसी दिए गए प्रासंगिक क्षमताओं की सूची में निश्चित होने चाहिए।

गद्यांश के अनुसार, एक सुदृढ़ और आलोचनात्मक मूल्यांकन किसमें परिणत होगा?

Aअन्योन्यक्रियात्मक सार्वजनिक चर्चाएँ ✓ Correct
Bआत्म-केंद्रित आकलन
Cउपयोगी सूचना की उपलब्धता
Dएकांतबद्ध चिंतन
Correct answer: (A) अन्योन्यक्रियात्मक सार्वजनिक चर्चाएँ
Explanation

उत्तर अन्योन्यक्रियात्मक सार्वजनिक चर्चाएँ है।

गद्यांश कहता है कि आलोचनात्मक आकलन सार्वजनिक तर्क की उपयोगिता की ओर संकेत करता है।

एक सुदृढ़ मूल्यांकन केवल एकांत में रहने वाले व्यक्तियों का कार्य नहीं है।

यह अन्योन्यक्रियात्मक सार्वजनिक चर्चा के माध्यम से बढ़ता है।

अतः एक सुदृढ़ और आलोचनात्मक मूल्यांकन अन्योन्यक्रियात्मक सार्वजनिक चर्चाओं में परिणत होता है।

आत्म-केंद्रित आकलन और एकांतबद्ध चिंतन वही हैं जिनके विरुद्ध गद्यांश सचेत करता है।

अतः उत्तर अन्योन्यक्रियात्मक सार्वजनिक चर्चाएँ है।

Want more like this? Create a free account to practise a full test, track your progress, and get spaced-repetition review.

Practise on Mcqkart →🎓 Book an expert →