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वाक्यांश 'यह किस जैसा है' एक मौलिक विचार-प्रक्रिया (thought process) को दर्शाता है। पृथ्वी-अवकाश के खंडों में स्थित वस्तुओं और घटनाओं का प्रेक्षण और प्रतिवेदन कोई कैसे करे? पृथ्वी के धरातल पर परिघटनाओं की अनंत विविधताओं में से कोई कैसे तय करे कि किन परिघटनाओं का प्रेक्षण किया जाए? पृथ्वी या उसके किसी भाग का कोई पूर्ण वर्णन नहीं होता, क्योंकि पृथ्वी की सतह का प्रत्येक सूक्ष्म बिंदु हर दूसरे ऐसे बिंदु से भिन्न होता है।

अनुभव दिखाता है कि प्रेक्षित वस्तुएँ पहले से परिचित होती हैं क्योंकि वे घर पर घटित होने वाली परिघटनाओं जैसी होती हैं, या क्योंकि वे मानव-मन में विकसित अमूर्त बिंबों और प्रतिमानों से मिलती-जुलती हैं। अमूर्त बिंब कैसे बनते हैं? पृथ्वी के सभी अन्य प्राणियों में केवल मनुष्य के पास भाषा है, और उसके शब्द न केवल विशिष्ट वस्तुओं को, बल्कि वस्तुओं के वर्गों के मानसिक बिंबों को भी प्रतीकित करते हैं। लोग जो देख या अनुभव कर चुके हैं उसे इसलिए स्मरण रख पाते हैं क्योंकि वे उससे एक शब्द-प्रतीक जोड़ देते हैं।

पृथ्वी के धरातल को मानव-आवास (human habitat) के रूप में और अधिक जानने के अपने दीर्घ प्रयासों के अभिलेख में वस्तुओं और घटनाओं के बीच निरंतर अंतःक्रिया रही है। इंद्रियों के माध्यम से प्रत्यक्ष प्रेक्षण को प्रत्यक्ष (percept) कहा जाता है, और मानसिक बिंब को संप्रत्यय (concept) कहा जाता है। कुछ लोग प्रत्यक्ष को ही वास्तविकता कहते हैं, इसके विपरीत मानसिक बिंब सैद्धांतिक होते हैं, जिससे यह ध्वनित होता है कि वे वास्तविक नहीं हैं।

प्रत्यक्ष का संप्रत्यय से संबंध उतना सरल नहीं जितना परिभाषा से लगता है। अब यह काफी स्पष्ट है कि भिन्न संस्कृतियों के लोग, या एक ही संस्कृति के व्यक्ति भी, वास्तविकता के भिन्न मानसिक बिंब विकसित करते हैं, और वे जो अनुभव करते हैं वह इन पूर्वधारणाओं का प्रतिबिंब होता है। अतः पृथ्वी के धरातल पर वस्तुओं और घटनाओं का प्रत्यक्ष प्रेक्षण स्पष्टतः प्रेक्षक के मन के मानसिक बिंबों का प्रतिफल है, इतना कि वास्तविकता के समूचे विचार पर पुनर्विचार करना पड़ता है। संप्रत्यय यह निर्धारित करते हैं कि प्रेक्षक क्या अनुभव करता है, फिर भी संप्रत्यय पूर्व प्रत्यक्षों के सामान्यीकरणों से व्युत्पन्न होते हैं।

गद्यांश के अनुसार, मनुष्य के मन में निम्नलिखित में से क्या सबसे अधिक रहता है?

Aवस्तुओं का प्रेक्षण
Bमानसिक बिंबों का निर्माण ✓ Correct
Cभाषा के माध्यम से अभिव्यक्ति
Dज्ञान अर्जित करना
Correct answer: (B) मानसिक बिंबों का निर्माण
Explanation

मनुष्य के मन में सबसे अधिक मानसिक बिंबों का निर्माण रहता है, अतः यही उत्तर है।

गद्यांश कहता है कि केवल मनुष्य के पास भाषा है, जिसके शब्द वस्तुओं के वर्गों के मानसिक बिंबों को दर्शाते हैं।

यह कहता है कि लोग जो देख चुके हैं उसे स्मरण रखते हैं क्योंकि वे उससे एक शब्द-प्रतीक जोड़ देते हैं।

अतः मन मुख्यतः मानसिक बिंब बनाने और धारण करने में व्यस्त रहता है।

वस्तुओं का प्रेक्षण निवेश है, पर मन मुख्यतः उसे बिंबों में बदल देता है।

भाषा और ज्ञान साधन हैं, अतः उत्तर मानसिक बिंबों का निर्माण है।

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