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प्रतिष्ठित लेखक इलिच विशेषज्ञ-आधारित संस्थाओं के हानिकारक स्वरूप की अपनी तीखी आलोचना के लिए सबसे अधिक जाने जाते हैं। ये चिकित्सा और शिक्षा से लेकर ऊर्जा और परिवहन तक फैली थीं। कार्य के स्त्रैणीकरण के अशक्तकारी प्रभाव और लैंगिक संघर्षों को व्यक्तिगत आर्थिक तथा राजनीतिक समानता के मामले तक सीमित करना भी इनमें थे।

उनकी पुस्तक 'टूल्स फॉर कन्विविऐलिटी' उनकी अनेक आलोचनाओं का सार प्रस्तुत करती है। ये एक राजनीतिक दृष्टि के संदर्भ में रखी गई थीं, अर्थात सहभोजी (convivial) जीवन-शैलियों का पुनर्निर्माण। उन्होंने इसे सहभोजिता (conviviality) कहा।

पुस्तक सचेत रूप से औद्योगिक युग की उपसंहार-कथा के रूप में लिखी गई थी। इसके पीछे यह विश्वास था कि जन-उत्पादन की उन्नत अवस्था में, कोई भी समाज अपना विनाश स्वयं उत्पन्न करता है। उनकी मुख्य संकल्पना उत्पादन की औद्योगिक विधि से संबंधित थी। उन्होंने कहा कि एक सीमा से आगे औद्योगिक उपकरण लोगों और पर्यावरण को हानि पहुँचाएँगे।

सीमाओं का निरंतर क्षरण सत्रहवीं शताब्दी में ऊर्जा के दोहन के साथ आरंभ हुआ। इसमें समय और स्थान का उत्तरोत्तर उन्मूलन जुड़ा, जिसे औद्योगिक क्रांति से बल मिला। इसने बीसवीं शताब्दी में समाज का पूर्ण पुनर्गठन कर दिया, विशिष्ट ज्ञान के उपकरणों और प्रौद्योगिकियों की सहायता से।

अनुच्छेद के अनुसार, निष्कर्ष यह है कि

Aविशिष्ट विशेषज्ञता नितांत आवश्यक है
Bएक औद्योगिक समाज एक कल्याणकारी समाज है
Cसहभोजिता की अपनी सीमाएँ होनी चाहिए ✓ Correct
Dऔद्योगीकरण अत्यंत लाभकारी है
Correct answer: (C) सहभोजिता की अपनी सीमाएँ होनी चाहिए
Explanation

निष्कर्ष यह है कि सहभोजिता की अपनी सीमाएँ होनी चाहिए, अतः यही उत्तर है।

अनुच्छेद चेतावनी देता है कि एक सीमा से आगे औद्योगिक उपकरण लोगों और पर्यावरण को हानि पहुँचाते हैं।

अतः किसी समाज द्वारा प्रयुक्त उपकरणों और प्रौद्योगिकियों पर सीमाएँ होनी चाहिए।

इलिच के शब्दों में, सहभोजी जीवन को ऐसी सीमाओं का सम्मान करना चाहिए।

अतः निष्कर्ष यह है कि सहभोजिता की अपनी सीमाएँ होनी चाहिए।

अनुच्छेद यह निष्कर्ष नहीं देता कि विशेषज्ञता या औद्योगीकरण केवल लाभकारी है।

अतः उत्तर यह है कि सहभोजिता की अपनी सीमाएँ होनी चाहिए।

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