सृजनात्मक समाज (creative society) की संकल्पना किसी समाज के विकास के उस चरण की ओर संकेत करती है, जिसमें बड़ी संख्या में संभावित अंतर्विरोध (contradictions) मुखर और सक्रिय हो जाते हैं।
यह सबसे अधिक तब प्रकट होता है जब उत्पीड़ित सामाजिक समूह राजनीतिक रूप से संगठित होकर अपने अधिकारों की माँग करते हैं। किसानों और जनजातियों का उभार, क्षेत्रीय स्वायत्तता और आत्म-निर्णय के आंदोलन, पर्यावरण आंदोलन, तथा विकासशील देशों में महिला आंदोलन समकालीन समय में एक सृजनात्मक समाज के उदय के संकेत हैं।
सामाजिक आंदोलनों के रूप और उनकी तीव्रता देश-देश में तथा एक ही देश के भीतर स्थान-स्थान पर भिन्न हो सकती है, किंतु किसी समाज के विविध क्षेत्रों में सामाजिक रूपांतरण (social transformation) के आंदोलनों की उपस्थिति मात्र ही किसी देश में एक सृजनात्मक समाज के उदय को दर्शाती है।
गद्यांश के अनुसार, सामाजिक आंदोलनों की अभिव्यक्तियाँ क्या हैं? नीचे दिए कोड से सही उत्तर चुनिए।
गद्यांश द्वारा समर्थित एकमात्र अभिव्यक्ति कथन 3 है, अतः यही उत्तर है।
पूरा गद्यांश आंदोलनों के माध्यम से सामाजिक समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की खोज की ओर संकेत करता है।
अतः कथन तीन गद्यांश में व्याप्त अधिकारों की माँग पर बैठता है।
कथन एक गलत है, क्योंकि सामाजिक आंदोलनों का आक्रामक होना आवश्यक नहीं।
कथन दो गलत है, क्योंकि समूह भीतर से संगठित होकर अपने अधिकार माँगते हैं, संपूर्ण समाज एक साथ नहीं।
अतः केवल कथन 3 सामाजिक आंदोलनों की अभिव्यक्ति है।
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