15वीं शताब्दी के आरंभ ने ओड़िया कवियों के लिए एक नया क्षितिज खोला। यह ओड़िया इतिहास के सर्वाधिक गौरवशाली काल के साथ मेल खाता है।
ओडिशा की धरती के एक योग्य पुत्र कपिलेंद्र देव (1434-1467) ने एक दक्षिणी राजवंश 'गंगों' के हाथों से राज्य छीनकर ओडिशा के सम्राट बने। उन्होंने अनेक युद्धों में दक्षिण में कृष्णा नदी तक तथा गुलबर्गा तक दक्षिणी प्रायद्वीप के विशाल क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की, जिसने ओड़िया लोगों में एक वीर राष्ट्र के रूप में आत्मविश्वास का वातावरण उत्पन्न किया, और उन्होंने अपनी भाषा एवं साहित्य को समृद्ध करने की ओर अपना ध्यान लगाया। परिणामस्वरूप, समाज से सरला दास जैसे महान कवि का उदय हुआ।
राजा कपिलेंद्र देव ने अपने लोगों को ओड़िया में लिखने के लिए भी प्रोत्साहित किया और उन्होंने स्वयं अपनी संस्कृत कृति 'परशुराम व्यायोग' में एक ओड़िया कविता सम्मिलित की तथा संस्कृत एवं तमिल के स्थान पर ओड़िया को राज्य भाषा के रूप में स्वीकार किया, और उन्होंने ओड़िया पर अनेक राजकीय आदेश जारी किए। जगन्नाथ के प्रति उनके प्रगाढ़ प्रेम तथा उन पर उनकी पूर्ण निर्भरता ने एक सृजनात्मक वातावरण लाने में बहुत योगदान दिया।
गद्यांश के अनुसार, कपिलेंद्र देव की विजयों और विविध लोगों के एकीकरण के महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रभावों में से एक क्या था?
एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रभाव ओड़िया साहित्यिक रचना को प्रोत्साहन था, अतः यही उत्तर है।
गद्यांश कहता है कि उनकी विजयों ने ओड़ियों में आत्मविश्वास बनाया।
फिर उन्होंने अपनी भाषा और साहित्य की ओर ध्यान दिया।
सरला दास जैसे महान कवि उभरे, और राजा ने ओड़िया में लिखने को प्रोत्साहित किया।
अतः एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रभाव ओड़िया साहित्यिक रचना को प्रोत्साहन था।
गद्यांश ओड़िया के पतन या क्षेत्रीय भाषाओं पर प्रतिबंध का वर्णन नहीं करता।
Want more like this? Create a free account to practise a full test, track your progress, and get spaced-repetition review.
Practise on Mcqkart →🎓 Book an expert →