नारीवाद एक मेटा-विचारधारा है जो हाल के दशकों में सामाजिक विज्ञान के अनेक क्षेत्रों में ध्यान आकर्षित कर रही है। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में लिंग के विषय को सम्मिलित करने का प्रारंभिक बिंदु स्त्री एवं पुरुष के बीच मूलभूत असमानताओं तथा वैश्विक राजनीति पर ऐसी असमानताओं के प्रभाव पर बहस से होता है। वैश्विक लिंग मुद्दों पर उल्लेखनीय कार्य यह तर्क देते हैं कि स्त्रियाँ पुरुषों की तुलना में एक वंचित समूह हैं।
उनके पास विश्व की लगभग 1 प्रतिशत संपत्ति है और वरिष्ठ संगठनों तथा पदों के शीर्ष पर 5 प्रतिशत से भी कम स्त्रियाँ हैं; जबकि स्त्रियाँ कुल कार्य-घंटों का 60 प्रतिशत करती हैं, उन्हें कुल आय का केवल 10 प्रतिशत ही प्राप्त होता है। उनकी स्थिति दयनीय है क्योंकि उनमें निरक्षरता की दर उच्च है; समस्त निरक्षरों में 60 प्रतिशत स्त्रियाँ हैं और समस्त शरणार्थियों में 80 प्रतिशत स्त्रियाँ हैं। लिंग के आधार पर विभेद स्पष्ट है।
विश्व राजनीति पर एक लिंग-संवेदनशील दृष्टिकोण ऐसी चुनौतियों को उजागर करने का लक्ष्य रखता है। यह उन आर्थिक प्रणालियों के संचालन की ओर संकेत करता है जो स्त्रियों के लिए वंचित परिस्थितियाँ उत्पन्न करती हैं।
जैकी टू (Jackie True) ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तथा विश्व बैंक द्वारा अपनाई गई संरचनात्मक समायोजन की आर्थिक विकास नीतियों तथा श्रम के अंतर्राष्ट्रीय विभाजन में परिवर्तनों ने 'गरीबी के स्त्रीकरण' को बढ़ाया है। निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्रों में अल्प-वेतन का अत्यंत कठोर कार्य, यौन पर्यटन तथा प्रवासी घरेलू कामगार इसके उदाहरण हैं कि किस प्रकार एक अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विकास के क्रम में स्त्रियों का शोषण किया जाता है। कई दशकों से कार्यस्थल में स्त्रियों की उच्च भागीदारी दर के बावजूद, उन्नत औद्योगिक समाजों में लिंग असमानता एवं विभेद के विभिन्न रूप बने हुए हैं।
गद्यांश के अनुसार, महिलाएँ लिंग असमानता और भेदभाव का सामना करती हैं:
महिलाएँ पूरे विश्व में असमानता और भेदभाव का सामना करती हैं, अतः यही उत्तर है।
गद्यांश कहता है कि लिंग के आधार पर भेदभाव पूरे विश्व में स्पष्ट है।
यह बताता है कि उन्नत औद्योगिक समाजों में भी असमानता बनी रहती है।
अतः यह केवल विकासशील या विकसित देशों तक सीमित नहीं है।
यह एक वैश्विक समस्या है जो हर जगह महिलाओं को प्रभावित करती है।
अतः महिलाएँ पूरे विश्व में लिंग असमानता और भेदभाव का सामना करती हैं।
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