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विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या किसी न किसी रूप में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का उपयोग करती है। भारत का एक विशिष्ट और अद्वितीय पारंपरिक चिकित्सा आधार है, जिसमें प्रत्येक प्रणाली का अपना प्राचीन दर्शन, औषधीय ज्ञान, बोध और अभ्यास है जो क्षेत्रीय संस्कृतियों, परंपराओं और विश्वासों के अनुरूप हैं।

भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और होम्योपैथी शामिल हैं, जिन्हें आयुष के रूप में जाना जाता है। ये सभी प्रणालियाँ आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान के आगमन से बहुत पहले एक निरंतरता में तैयार, अभ्यस्त और परिष्कृत की गईं। विश्व के अनेक देशों में चिकित्सकीय बहुलवाद आदर्श है, और पारंपरिक चिकित्सा विश्व जनसंख्या हेतु स्वीकार्य, सुरक्षित और आर्थिक रूप से व्यवहार्य विधियों से पूर्ण स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने के सबसे निश्चित साधनों में से एक है।

कोई भी चिकित्सा प्रणाली अकेले सभी स्वास्थ्य चिंताओं का समाधान नहीं कर सकती, पर प्रत्येक के सकारात्मक पक्षों को समेटने वाला एक समेकित दृष्टिकोण निश्चय ही मानवता को लाभ पहुँचा सकता है। समग्र, रोगी-केंद्रित और वैयक्तिकृत दृष्टिकोण पारंपरिक प्रणालियों की पहचान है और रोगी-चिकित्सक साझेदारी को उपचार तथा जीवनशैली सलाह गढ़ने या अनुकूलित करने में सक्षम बनाता है ताकि कल्याण की उच्चतम क्षमता प्राप्त हो सके। यह जागरूकता, पारंपरिक चिकित्सा के बढ़ते उपयोग के साथ मिलकर, इन प्रणालियों को अग्रभूमि में ले आई है।

महामारी के दौरान निरोधक देखभाल के प्रावधान से लेकर रोग प्रबंधन तक और आयुष प्रणाली के सार्वजनिक स्वास्थ्य में प्रभावी क्रियान्वयन तथा एकीकरण जैसी विविध गतिविधियों ने आयुष प्रणालियों की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। इससे जामनगर में पारंपरिक चिकित्सा हेतु वैश्विक केंद्र की स्थापना के लिए मेजबान देश समझौते पर हस्ताक्षर संभव हुए हैं।

गद्यांश हेतु उपयुक्त शीर्षक चुनिए।

Aएलोपैथी
Bसमग्र स्वास्थ्य देखभाल (holistic healthcare) ✓ Correct
Cआयुर्वेद
Dहोम्योपैथी
Correct answer: (B) समग्र स्वास्थ्य देखभाल (holistic healthcare)
Explanation

उपयुक्त शीर्षक समग्र स्वास्थ्य देखभाल है, अतः यही उत्तर है।

गद्यांश अनेक पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की एक साथ चर्चा करता है।

यह स्वास्थ्य के प्रति समग्र, रोगी-केंद्रित और समेकित दृष्टिकोण पर बल देता है।

समग्र स्वास्थ्य देखभाल इस व्यापक विषय को पकड़ती है।

एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी प्रत्येक केवल एक प्रणाली का नाम लेते हैं।

अतः समग्र स्वास्थ्य देखभाल सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक है।

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