निगमनात्मक तर्कण किस दिशा में आगे बढ़ता है?
Aविशिष्ट से सार्विक की ओर
Bसार्विक से विशिष्ट की ओर ✓ Correct
Cविशिष्ट से विशिष्ट की ओर
Dसार्विक से सार्विक की ओर
Correct answer: (B) सार्विक से विशिष्ट की ओर
Explanation
निगमनात्मक तर्कण सार्विक या सामान्य से विशिष्ट की ओर बढ़ता है।
आधारवाक्य के रूप में स्वीकृत सामान्य नियम को उसके अधीन आने वाले किसी विशेष उदाहरण पर लागू किया जाता है।
'सभी मनुष्य मरणशील हैं' से यह निकाला जाता है कि कोई विशेष मनुष्य मरणशील है।
निष्कर्ष कभी उससे आगे नहीं जाता जो सामान्य आधारवाक्य में पहले से निहित है।
व्यापक वर्ग से संकुचित उदाहरण की ओर यही अवतरण निगमन का लक्षण है।
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