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नौ दशकों से अधिक समय से वैज्ञानिकों ने उस प्रक्रिया की नकल करने का प्रयास किया है जो सूर्य और तारों के लिए ऊर्जा उत्पन्न करती है, संलयन (fusion)। मंगलवार को, कैलिफ़ोर्निया के नेशनल इग्निशन फ़ैसिलिटी (NIF) के शोधकर्ताओं ने एक उपलब्धि की घोषणा की।

उन्होंने दो नाभिकों को मिलाकर एक भारी नाभिक बनाया, और उनके रिएक्टर ने प्रक्रिया में उपयोग की गई ऊर्जा से लगभग 1.5 गुना अधिक ऊर्जा उत्पन्न की। संलयन का दोहन करने के सभी पूर्व प्रयासों में, रिएक्टरों ने उत्पादित ऊर्जा से अधिक ऊर्जा खर्च की। परंतु वैज्ञानिक कहते हैं कि कैलिफ़ोर्निया प्रयोगशाला में विकसित इस प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर लाने में कम से कम दो दशक लगेंगे।

कई देश अपनी जलवायु-संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने हेतु नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ रहे हैं। फिर भी बिजली उत्पादन वर्तमान में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के 25 से 30 प्रतिशत के लिए ज़िम्मेदार है। नवीकरणीय स्रोतों की स्वाभाविक रूप से अस्थिर प्रकृति के कारण देशों को जीवाश्म-ईंधन ऊर्जा स्रोत छोड़ना बहुत कठिन लगता है।

परंपरागत रूप से उत्पादित नाभिकीय ऊर्जा, जो विखंडन (fission) तकनीक का उपयोग करती है, अपेक्षाकृत स्वच्छ है। परंतु 1986 में चेर्नोबिल और 2011 में फ़ुकुशिमा की दुर्घटनाओं ने विखंडन-चालित संयंत्रों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।

संलयन प्रक्रिया में खपत की गई प्रत्येक 100 इकाई ऊर्जा के लिए, कैलिफ़ोर्निया की नेशनल इग्निशन फ़ैसिलिटी कितनी इकाई ऊर्जा उत्पन्न कर सकी?

A50
B100
C125
D150 ✓ Correct
Correct answer: (D) 150
Explanation

उत्तर 150 है।

रिएक्टर ने उपयोग की गई ऊर्जा का लगभग 1.5 गुना उत्पन्न किया।

अतः प्रत्येक 100 इकाई खपत के लिए, उत्पादन 100 गुणा 1.5 है।

यह 150 इकाई के बराबर है।

अतः सुविधा ने प्रत्येक 100 उपयोग के लिए 150 इकाई उत्पन्न कीं।

अन्य आँकड़े 1.5 गुना लाभ में फिट नहीं होते।

अतः उत्तर 150 है।

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