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रोमन साम्राज्य के पतन के साथ चीन हिंद महासागर में व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बन गया था। चीनी लोग भारी मात्रा में मसालों का उपभोग करते थे, जो दक्षिण-पूर्व एशिया तथा भारत से आयात होते थे। वे हाथी दाँत भी आयात करते थे, जिसका सर्वोत्तम अफ्रीका से आता था, तथा काँच का सामान, जो पश्चिम एशिया से आता था।

इनके साथ औषधीय जड़ी-बूटियाँ, लाख, धूप तथा सभी प्रकार की दुर्लभ वस्तुएँ जुड़ गईं। सामान्यतः अफ्रीका तथा पश्चिम एशिया के उत्पाद दक्षिण भारत में मालाबार से आगे नहीं जाते थे। न ही चीनी जहाज दक्षिण-पूर्व एशिया में मोलुक्कास से आगे जाते थे।

इस प्रकार भारत तथा दक्षिण-पूर्व एशिया दोनों चीन एवं पश्चिम एशिया तथा अफ्रीका के देशों के बीच व्यापार के महत्वपूर्ण पड़ाव केंद्र थे। भारतीय व्यापारी, विशेषकर तमिल तथा कलिंग (आधुनिक ओडिशा एवं बंगाल से), फारसियों तथा बाद में अरबों के साथ इस व्यापार में सक्रिय भूमिका निभाते थे।

चीन तक का अधिकांश व्यापार भारतीय जहाजों में होता था, तथा मालाबार, बंगाल एवं बर्मा की सागौन लकड़ी जहाज निर्माण की एक सुदृढ़ परंपरा का आधार प्रदान करती थी। मौसमी परिस्थितियाँ भी ऐसी थीं कि किसी जहाज का मध्य पूर्व से सीधे चीन तक जाना संभव नहीं था। जहाजों को अनुकूल हवाओं हेतु बीच के बंदरगाहों में लंबी अवधि प्रतीक्षा करनी पड़ती थी, जो मानसून से पूर्व पश्चिम से पूर्व की ओर तथा मानसून के पश्चात पूर्व से पश्चिम की ओर बहती थीं।

नीचे दो कथन दिए गए हैं। उपर्युक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनिए:

Statement I:चीनी जहाज चीन से मध्य पूर्व तथा पश्चिम एशिया तक पूरी यात्रा करते थे।
Statement II:चीनी जहाज व्यापार हेतु मालाबार तट तक आते थे।
Aकथन I तथा कथन II दोनों सही हैं
Bकथन I तथा कथन II दोनों गलत हैं ✓ Correct
Cकथन I सही है तथा कथन II गलत है
Dकथन I गलत है तथा कथन II सही है
Correct answer: (B) कथन I तथा कथन II दोनों गलत हैं
Explanation

गद्यांश के अनुसार चीनी जहाज मोलुक्कास से आगे नहीं जाते थे, अतः दोनों कथन गलत हैं। अतः विकल्प B।

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