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नीचे दो कथन दिए गए हैं। उपर्युक्त कथनों के आलोक में सही उत्तर चुनिए।

Statement I:अरस्तूवादी तर्कशास्त्र शब्दवादी है।
Statement II:भारतीय तर्कशास्त्र के शास्त्रीय संप्रदाय (न्याय) के लिए शाब्दिक रूप अनुमान का सार नहीं है और केवल दूसरों को समझाने हेतु आवश्यक है।
Aकथन I और कथन II दोनों सत्य हैं ✓ Correct
Bकथन I और कथन II दोनों असत्य हैं
Cकथन I सत्य है परंतु कथन II असत्य है
Dकथन I असत्य है परंतु कथन II सत्य है
Correct answer: (A) कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं
Explanation

दोनों कथन सत्य हैं।

अरस्तूवादी तर्कशास्त्र अनुमान की शाब्दिक अभिव्यक्ति पर बल देता है, इसलिए वह शब्दवादी कहलाता है।

न्याय के लिए शाब्दिक रूप स्वयं अनुमान का सार नहीं है।

कथित पंचावयवी न्यायवाक्य (परार्थानुमान) शब्दों का प्रयोग केवल दूसरे को समझाने हेतु करता है।

स्व के लिए अनुमान (स्वार्थानुमान) को किसी शाब्दिक रूप की आवश्यकता ही नहीं।

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