नीचे दो कथन दिए गए हैं। उपर्युक्त कथनों के आलोक में सही उत्तर चुनिए।
Statement I:भारतीय तर्कशास्त्र के शास्त्रीय संप्रदाय (न्याय) के अनुसार, सभी भ्रांतियाँ सामग्रीगत भ्रांतियाँ हैं।
Statement II:न्याय न्यायवाक्य निगमनात्मक-आगमनात्मक है परंतु औपचारिक-सामग्रीगत नहीं।
Aकथन I और कथन II दोनों सही हैं
Bकथन I और कथन II दोनों गलत हैं
Cकथन I सही है परंतु कथन II गलत है ✓ Correct
Dकथन I गलत है परंतु कथन II सही है
Correct answer: (C) कथन I सही है परंतु कथन II गलत है
Explanation
यह न्याय-मत कि हर भ्रांति सामग्रीगत है, सही है, परंतु दूसरा दावा नहीं।
न्याय में सभी हेत्वाभास हेतु के वस्तुओं से वास्तविक संबंध से उठते हैं, कभी केवल रूप से नहीं, अतः सभी सामग्रीगत हैं।
न्याय अनुमान एक साथ निगमनात्मक और आगमनात्मक है, वास्तविक अविनाभाव (invariable concomitance) पर आधारित।
अतः वह औपचारिक न होकर सामग्रीगत है, इसलिए उसे औपचारिक-सामग्रीगत नहीं कहना उसका गलत वर्णन है।
न्याय-न्याय निगमनात्मक-आगमनात्मक तथा सामग्रीगत है, जिससे कथन 2 असत्य ठहरता है।
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