नीचे दो कथन दिए गए हैं। उपर्युक्त कथनों के आलोक में सही उत्तर चुनिए।
Statement I:भारतीय तर्कशास्त्र के शास्त्रीय संप्रदाय (न्याय) के अनुसार, कोई स्वयं के लिए अनुमान कर सकता है।
Statement II:न्याय संप्रदाय के अनुसार, स्वयं के लिए अनुमान एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है और इसमें न्याय के विभिन्न अवयवों के औपचारिक कथन की आवश्यकता नहीं होती।
Aकथन I और कथन II दोनों सही हैं ✓ Correct
Bकथन I और कथन II दोनों गलत हैं
Cकथन I सही है परंतु कथन II गलत है
Dकथन I गलत है परंतु कथन II सही है
Correct answer: (A) कथन I और कथन II दोनों सही हैं
Explanation
दोनों कथन न्याय पद्धति में स्वार्थानुमान का सही वर्णन करते हैं।
न्याय अनुमान को स्वार्थानुमान (स्वयं के लिए) और परार्थानुमान (दूसरों के लिए) में बाँटता है।
कथन 1 सही मानता है कि कोई स्वयं के लिए अनुमान कर सकता है।
कथन 2 सही मानता है कि यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें औपचारिक अवयवों की आवश्यकता नहीं।
पाँच अवयवों वाला औपचारिक न्याय-वाक्य केवल दूसरों के समक्ष अनुमान प्रदर्शित करने हेतु आवश्यक है।
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