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भारत में सह-शिक्षा (co-education) कोई बहुत पुरानी प्रथा नहीं रही है। यह स्वतंत्रता-पूर्व काल में आरंभ हुई, जब शिक्षा-आंदोलन राष्ट्रीय आंदोलन के अंग के रूप में शुरू हुए। यह समझा गया कि सह-शिक्षा आधुनिक शिक्षा का एक अंग है जो लैंगिक पूर्वाग्रहों को घटाती है। आधुनिक शिक्षा भारत में उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभिक भाग में शुरू हुई। सह-शिक्षा लैंगिक समानता और कौशल-विकास की भावना पर आधारित है, ताकि हम महिलाओं को शीर्ष पदों पर देख सकें।

लड़कियाँ और लड़के एक-दूसरे से बातचीत की स्वतंत्रता चाहते हैं, ताकि रूढ़िवादी, संदेहशील और अज्ञानी बने रहने के बजाय एक स्वस्थ व्यवहार बन सके। हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी लड़कों और लड़कियों के अलग विद्यालय दिखते हैं। अब सह-शिक्षा बड़े कस्बों और शहरों में, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों में अपनाई जाती है, और इसे पूर्ण व्यक्तित्व-विकास हेतु लाभकारी माना जाता है। वस्तुतः, स्विट्ज़रलैंड सह-शिक्षा आरंभ करने वाला पहला राष्ट्र था। फिर यह परिघटना अन्य पश्चिमी राष्ट्रों में फैली, और अब यह जीवन की एक आधुनिक शैली है।

यह शिक्षा-प्रणाली बहुत मितव्ययी भी है। यह अधिक अलग भवनों और शिक्षकों हेतु आवश्यक वित्तीय भार को घटाती है। भारत जैसा विकासशील राष्ट्र सदा वित्तीय संकट में रहा है, और हम शिक्षा में निवेश पर सदा बेहतर प्रतिफल खोजते हैं। लड़कों और लड़कियों के बीच बेहतर समझ अंततः हमारी पारिवारिक और सामाजिक प्रगति का संकेत है, क्योंकि वे संबंधों की बारीकियों को बेहतर जान सकते हैं।

लड़कों को खतरनाक जीव के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाता; बल्कि लड़कों को लड़कियों के साथ सम्मानजनक और सभ्य व्यवहार करना सीखना चाहिए, ताकि लैंगिक-संबद्ध अपराध-दर घटे। समाज बेहतर सामाजिक नियंत्रण और अनुशासन रख सकता है, क्योंकि लड़के लड़कियों की उपस्थिति में शालीनता से व्यवहार करते हैं। लड़कियाँ भी अपनी सामाजिक झिझक से बाहर आती हैं। एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा उत्पन्न होती है, और वे अपनी प्रतिभा, कौशल और क्षमताओं को इच्छित ढंग से खोज सकती हैं। यह समाज के परिष्कार में सहायता करता है।

लड़के लड़कियों की उपस्थिति में कैसा व्यवहार करते पाए जाते हैं?

Aलड़के उनकी उपस्थिति में शालीनता से व्यवहार करते हैं ✓ Correct
Bसमाज में हिंसक घटनाएँ बढ़ना निश्चित है
Cलड़के बेरोज़गारी जैसे मुद्दों से अधिक परेशान होते हैं
Dलड़के अपनी गतिविधियों में अधिक झिझकने लगते हैं
Correct answer: (A) लड़के उनकी उपस्थिति में शालीनता से व्यवहार करते हैं
Explanation

लड़के लड़कियों की उपस्थिति में शालीनता से व्यवहार करते हैं, अतः यही उत्तर है।

गद्यांश कहता है कि समाज बेहतर सामाजिक नियंत्रण और अनुशासन रख सकता है।

यह कारण देता है कि लड़के लड़कियों की उपस्थिति में शालीनता से व्यवहार करते हैं।

अतः कथित व्यवहार शालीन और अनुशासित आचरण है।

गद्यांश यह नहीं कहता कि हिंसक घटनाएँ बढ़ती हैं; यह अपराध घटने की अपेक्षा करता है।

यह नहीं कहता कि लड़के अधिक परेशान या झिझकने लगते हैं, अतः उत्तर यह है कि वे शालीनता से व्यवहार करते हैं।

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