लोकतंत्र के अधिकांश समर्थक सुझाव देने में चुप्पी साध लेते है कि लोकतंत्र अपने आप ही विकास और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देगा। वे उसे अच्छे के रूप में देखने की ओर प्रवृत्त लेकिन स्पष्ट रूप से अलग और व्यापकता में स्वतंत्र लक्ष्य वाले होते हैं। लोकतंत्र के निंदक अपनी दूसरी तरफ लोकतंत्र और विकास के मध्य गंभीर तनाव के रूप में जो देखते है उसे व्यक्त करने की इच्छा प्रतीत होती है।
इन मुद्दों से निपटने के लिए जिसे हम विकास कह सकते हैं और लोकतंत्र की व्याख्या दोनों पर विशेष ध्यान देना होगा। लोग जिससे आगे बढ़ सके और जो वास्तविक स्वतंत्रता उन्हे मिल रही है उसे विकास के निर्धारण के लिए छोड़ा नही जा सकता है।
सुविधा की जड़ वस्तुओं की वृद्धि के रूप में सिर्फ न के बराबर विकास देखा जा सकता है। उनकी मात्रा सम्मिलित लोगों की स्वतंत्रता और जीवन के साथ जो करते है, पर आवश्यक रूप से निर्भर करती है। विकास और लोकतंत्र के मध्य अंगभूत संबंध के भाग के रूप में देखा जा सकता है। हमें जटिल अभिज्ञान को नहीं भूलना चाहिए जो राजनीतिक स्वतंत्रताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के 'विकास के अंगभूत घटक' है।
विकास का निर्धारण कैसे किया जा सकता है?
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