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1958 से 1960 तक चीन में हुए अकाल में अनुमानतः लगभग 25 मिलियन लोग मारे गए। इसीलिए इसे एक राजनीतिक अपराध तथा एक वैचारिक अपराध कहा गया है, जिसकी सर्वाधिक विस्तृत विवेचना अमर्त्य सेन ने की।

यह उनके कार्य का वह भाग है जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। अमर्त्य सेन एक अर्थशास्त्री हैं जिन्होंने वैध कारणों से इसे एक वैचारिक अपराध माना। उन्होंने कहा कि यह आशय (intent) का विषय नहीं था; वे किसी को मारना नहीं चाहते थे।

बात केवल इतनी है कि वैचारिक संस्थाएँ ऐसी थीं कि यह घटित हुआ। चीन एक अधिनायकवादी राज्य था, जहाँ जो कुछ हो रहा था उसकी सूचना केंद्रीय सरकार तक नहीं पहुँच रही थी। वे कोई कार्रवाई नहीं कर सके, क्योंकि अधिनायकवादी राज्य में ऐसा ही होता है।

अतः यह अधिनायकवादी संस्थाओं का प्रतिबिंब है। यह एक बड़ा नरसंहार था, इसके पीछे कोई आशय नहीं था।

उपर्युक्त गद्यांश बीसवीं शताब्दी की क्रूरताओं के संदर्भ में अकाल को कैसे वर्गीकृत करता है?

Aएक जानबूझकर किया गया नरसंहार
Bएक मामूली घटना
Cएक अपरिहार्य आपदा
Dप्रमुख क्रूरताओं में से एक ✓ Correct
Correct answer: (D) प्रमुख क्रूरताओं में से एक
Explanation

इसे प्रमुख क्रूरताओं में से एक के रूप में वर्गीकृत किया गया है, अतः यही उत्तर है।

गद्यांश इसे एक बड़ा नरसंहार कहता है।

यह बल देता है कि इसके पीछे कोई मंशा नहीं थी।

फिर भी, यह शताब्दी की प्रमुख क्रूरताओं में गिना जाता है।

यह जानबूझकर, मामूली या केवल अपरिहार्य नहीं था।

अतः चौथा विकल्प सही है।

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