वैश्य परिवारों के प्रमुखों द्वारा स्थापित दानशाला अस्पतालों के रूप में वर्णित, फ़ाह्यान निर्धन और अपंग लोगों का एक वर्ग सूचीबद्ध करता है जिनकी इन अस्पतालों में जाँच कर उपचार हेतु औषधियाँ दी जाती थीं। रोगियों का ठहराव और औषधि की व्यवस्था भीतर ही उपलब्ध थी। वस्तुतः यह विवरण चरक द्वारा अपने ग्रंथ में उल्लिखित आदर्श आयुर्वेद अस्पताल के विद्यमान रूप का भौतिक प्रमाण देता प्रतीत होता है। सम्राट अशोक के औषधीय जड़ी-बूटियों के रोपण संबंधी अभिलेखों और 'आरोग्यशाला' की स्थापना के गुणों पर संस्कृत एवं पालि साहित्य के अंशों के साथ देखने पर चरक का अस्पताल-वर्णन ऐतिहासिक रूप से असंगत नहीं लगता। ये दक्षिण एशिया में संस्थागत स्वास्थ्य-देखभाल के प्रथम उद्भव-स्थल होने के भारतीय दावे को विश्वसनीयता देते हैं।
दिए गद्यांश में फ़ाह्यान जिस नगर की बात कर रहा है, उसकी पहचान कीजिए।
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