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निम्नलिखित में से अरस्तूवादी न्यायवाक्य की विशेषताएँ पहचानिए।

1.यह निगमनात्मक-आगमनात्मक और औपचारिक-भौतिक दोनों है
2.यह केवल निगमनात्मक और औपचारिक है
3.बृहत् और लघु पद आधारवाक्यों में अलग-अलग रहते हैं
4.यह शब्दप्रधान (verbalistic) है
5.शब्द-रूप अनुमिति का सार नहीं है
Aकेवल 1, 2 और 3
Bकेवल 2, 3 और 5
Cकेवल 2, 3 और 4 ✓ Correct
Dकेवल 1, 4 और 5
Correct answer: (C) केवल 2, 3 और 4
Explanation

अरस्तूवादी न्यायवाक्य केवल निगमनात्मक और औपचारिक है, आधार-वाक्यों में बृहत् एवं लघु पद को अलग रखता है, और शब्दप्रधान है।

यह दिए गए आधार-वाक्यों से आवश्यक निष्कर्ष निकालता है, अतः विशुद्ध निगमनात्मक है।

इसकी वैधता रूप पर निर्भर करती है, पदों के भौतिक सत्य पर नहीं।

बृहत् पद एक आधार-वाक्य में और लघु पद दूसरे में रहता है, दोनों केवल मध्य पद से जुड़ते हैं।

यह कथनों के शब्द-रूप पर कार्य करता है, इसीलिए इसका शब्दप्रधान (verbalistic) स्वरूप है।

यह मत कि शब्द-रूप सार नहीं और अनुमिति निगमन-आगमन दोनों है, भारतीय तर्कशास्त्र का है, इसका नहीं।

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