इस तर्क में की गई औपचारिक भ्रांति की पहचान कीजिए: 'सभी अपराधी मनुष्य हैं। सभी संत मनुष्य हैं। अतः सभी संत अपराधी हैं।'
Aमहत्तर पद के अवैध प्रक्रम की भ्रांति
Bलघु पद के अवैध प्रक्रम की भ्रांति
Cअवितरित मध्य पद की भ्रांति ✓ Correct
Dचार पदों की भ्रांति
Correct answer: (C) अवितरित मध्य पद की भ्रांति
Explanation
मध्य पद मनुष्य दो सकारात्मक आधार-वाक्यों का विधेय है और इसलिए कभी वितरित नहीं होता।
सभी अपराधी मनुष्य हैं और सभी संत मनुष्य हैं दोनों मध्य पद को अवितरित छोड़ते हैं।
वैध न्यायवाक्य के लिए मध्य पद का कम-से-कम एक आधार-वाक्य में वितरित होना आवश्यक है।
मध्य पद के हर जगह अवितरित रहने से अपराधियों और संतों के बीच कोई वास्तविक संबंध नहीं बनता।
यही चूक अवितरित मध्य पद की भ्रांति है।
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