1958 से 1960 तक चीन में हुए अकाल में अनुमानतः लगभग 25 मिलियन लोग मारे गए। इसीलिए इसे एक राजनीतिक अपराध तथा एक वैचारिक अपराध कहा गया है, जिसकी सर्वाधिक विस्तृत विवेचना अमर्त्य सेन ने की।
यह उनके कार्य का वह भाग है जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। अमर्त्य सेन एक अर्थशास्त्री हैं जिन्होंने वैध कारणों से इसे एक वैचारिक अपराध माना। उन्होंने कहा कि यह आशय (intent) का विषय नहीं था; वे किसी को मारना नहीं चाहते थे।
बात केवल इतनी है कि वैचारिक संस्थाएँ ऐसी थीं कि यह घटित हुआ। चीन एक अधिनायकवादी राज्य था, जहाँ जो कुछ हो रहा था उसकी सूचना केंद्रीय सरकार तक नहीं पहुँच रही थी। वे कोई कार्रवाई नहीं कर सके, क्योंकि अधिनायकवादी राज्य में ऐसा ही होता है।
अतः यह अधिनायकवादी संस्थाओं का प्रतिबिंब है। यह एक बड़ा नरसंहार था, इसके पीछे कोई आशय नहीं था।
उपर्युक्त गद्यांश में वर्णित चीन का अकाल किस अवधि में हुआ?
अकाल 1958 से 1960 तक हुआ, अतः यही उत्तर है।
गद्यांश यह अवधि सीधे बताता है।
यह इसमें लगभग 2.5 करोड़ मौतों का अनुमान देता है।
अन्य तिथि-सीमाएँ उल्लिखित नहीं हैं।
अतः अकाल 1958 से 1960 तक फैला।
अतः दूसरा विकल्प सही है।
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