माइक्रोन का 800 मिलियन डॉलर का अर्धचालक संयंत्र, और उसके बाद टाटा समूह तथा सीजी पावर को 1,30,000 करोड़ रुपये के निवेश (और अधिक प्रस्तावित) के साथ विनिर्माण तथा असेंबली, परीक्षण एवं पैकेजिंग (ATP) संयंत्रों की हाल की स्वीकृति, भारत में चिप विनिर्माण के इर्द-गिर्द केंद्रित एक रूपांतरकारी वैश्विक आपूर्ति शृंखला बदलाव की शुरुआत है। इससे भारत के भीतर प्रतिभाशाली और कुशल कार्यबल पर एक गुणक प्रभाव पड़ेगा।
यह गर्व की बात है कि वैश्विक अर्धचालक प्रतिभा-समूह का लगभग एक-तिहाई भारतीय है। तथापि, 2026 तक घरेलू अर्धचालक कार्यबल की आवश्यकता लगभग 3,00,000 अनुमानित है।
इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में लगभग साठ लाख की विशाल जनशक्ति आवश्यकता भी है, जो इस चिप उछाल का सबसे बड़ा लाभार्थी होगा। भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) स्नातकों का वर्तमान उत्पादन अपर्याप्त है। वृद्धि निश्चय ही गैर-आईआईटी परिक्षेत्र से आएगी, और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी तथा शिक्षा मंत्रालयों के नीति-मार्ग उद्योग और शिक्षा जगत के साथ मिलकर काम करने के प्रचुर अवसर प्रस्तुत करने हेतु अभिसरित होते हैं।
यह उद्योग-शिक्षा तालमेल भारत की सॉफ़्टवेयर सफलता की कहानी की कुंजी था। अब इसे एक विजयी सेमीकॉन त्रयी बनाने हेतु सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत की एक ऐसी ही त्रयी की आवश्यकता है।
वैश्विक अर्धचालक प्रतिभा-समूह में भारत का हिस्सा है:
वैश्विक अर्धचालक प्रतिभा-समूह में भारत का हिस्सा एक-तिहाई है, अतः यही उत्तर है।
गद्यांश अर्धचालकों में भारत की भूमिका पर चर्चा करता है।
यह गर्व से बताता है कि वैश्विक प्रतिभा-समूह का लगभग एक-तिहाई भारतीय है।
अतः भारत उस समूह का लगभग एक-तिहाई बनाता है।
अन्य भिन्न वे आँकड़े नहीं हैं जो दिए गए हैं।
अतः सही उत्तर एक-तिहाई है।
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