सूची I (निरुपाधिक न्यायवाक्य की आकृति) को सूची II (संरचना) से सुमेलित करें :
List I
i.प्रथम
ii.द्वितीय
iii.तृतीय
iv.चतुर्थ
List II
a.P, S-M -> S-P
b.M, S-M -> S-P
c.P, M-S -> S-P
d.M, M-S -> S-P
Ai-a, ii-b, iii-c, iv-d ✓ Correct
Bi-b, ii-a, iii-d, iv-c
Ci-a, ii-d, iii-b, iv-c
Di-d, ii-a, iii-c, iv-b
Correct answer: (A) i-a, ii-b, iii-c, iv-d
Explanation
प्रत्येक फिगर इस बात से निश्चित होती है कि मध्य-पद दोनों आधार-वाक्यों में कहाँ बैठता है।
प्रथम फिगर में मध्य-पद प्रमुख आधार का उद्देश्य और गौण आधार का विधेय होता है, जिससे M-P, S-M, अतः S-P मिलता है।
द्वितीय फिगर में मध्य-पद दोनों आधार-वाक्यों का विधेय होता है, जिससे P-M, S-M, अतः S-P मिलता है।
तृतीय फिगर में मध्य-पद दोनों आधार-वाक्यों का उद्देश्य होता है, जिससे M-P, M-S, अतः S-P मिलता है।
चतुर्थ फिगर में मध्य-पद प्रमुख आधार का विधेय और गौण आधार का उद्देश्य होता है, जिससे P-M, M-S, अतः S-P मिलता है।
इस प्रकार सुमेलन है i-a, ii-b, iii-c, iv-d।
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