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'ज्योतिष के दावों के लिए कभी किसी ने निर्णायक प्रमाण देने में सफलता नहीं पाई; अतः हमें यह निष्कर्ष निकालना चाहिए कि ज्योतिष निरर्थक है।' उपर्युक्त तर्क में कौन-सी भ्रांति की गई है?

Aजल्दबाज़ी का सामान्यीकरण
Bअज्ञान की अपील (appeal to ignorance) ✓ Correct
Cमिथ्या कारण
Dफिसलन ढाल
Correct answer: (B) अज्ञान की अपील (appeal to ignorance)
Explanation

तर्क प्रमाण के अभाव को विपरीत का प्रमाण बना देता है।

ज्योतिष के दावों के लिए किसी ने निर्णायक प्रमाण नहीं दिया।

प्रमाण के इस अभाव से यह निष्कर्ष निकाला जाता है कि ज्योतिष निरर्थक है।

किसी दावे को सिद्ध न कर पाना स्वयं यह स्थापित नहीं करता कि दावा असत्य है।

मात्र साक्ष्य के अभाव से असत्यता का अनुमान अज्ञान की अपील (appeal to ignorance) है।

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