जॉन बी वाट्सन, एक जन्तु प्रयोगवादी ने सबसे पहले उद्दीपन-अनुक्रिया (स्टिमुलस-रिस्पांस) मनोविज्ञान को लोकप्रिय बनाया। उनका तर्क था कि समस्त मानव कार्रवाइयाँ बाहरी पर्यावरणीय उद्दीपनों के प्रति एक अनुबंधित अनुक्रिया मात्र हैं।
वाट्सन के सिद्धांत को, पृथक्कृत मानवीय व्यवहारों पर इसके संकीर्ण फोकस के कारण, व्यवहारवाद के नाम से जाना जाता है। व्यवहारवादियों ने मनोविज्ञान की व्यापक रूप से प्रचलित इस प्रस्थापना को अस्वीकार कर दिया जिसके अनुसार सामान्यतः उच्चतर मानसिक प्रक्रियाएँ (अर्थात् सचेत विचार या अनुचिंतन) मानव कार्रवाइयों को नियंत्रित करती हैं। ऐसे ‘मनोवादी’ दृष्टिकोणों के विपरीत, व्यवहारवादियों ने यह तर्क दिया कि चेतना का उद्देश्य केवल यह है कि वह बाह्य उद्दीपनों द्वारा उत्पन्न किए गए व्यवहारों को बाद में तर्कसंगत ठहराए।
व्यवहारवादियों ने अपने सिद्धांतों में से सारी मनोवादी शब्दावलियों से पीछा छुड़ाने का प्रयास किया, और दृढ़ता से प्रेक्षणीय चरों के साथ ही काम किया, जिनमें एक ओर पर्यावरणी उद्दीपन थे और दूसरी ओर व्यवहार थे। विशिष्ट उद्दीपनों और विशिष्ट व्यवहारों के बीच की सम्बंद्धताओं के अध्ययन द्वारा व्यवहारवादियों ने कार्रवाइयों (एक्शन्स) के लिए उत्तरदायी पहले से अज्ञात कारणों के अन्वेषण की आशा की। अनुबंधन का विचार व्यवहारवाद की केन्द्रीय धारणाओं में से एक है। व्यवहारवादियों का तर्क था कि अधिकांश मानव-व्यवहार बाह्य पर्यावरण द्वारा अनुबंधन का परिणाम है।
सकारात्मक और नकारात्मक उद्दीपनों द्वारा, हमें कुछ निश्चित तरीकों से व्यवहार करने के लिए अनुबंधित किया गया है। हम पुरस्कार पाने या दण्ड से बचने के लिए कोई व्यवहार करते हैं।
मनोविज्ञान की एक व्यापक रूप से प्रचलित प्रस्थापना यह है कि :
गद्यांश उस व्यापक रूप से प्रचलित प्रस्थापना का नाम लेता है जिसे व्यवहारवादियों ने अस्वीकार किया, अर्थात उच्चतर मानसिक प्रक्रियाएं जैसे सचेत विचार सामान्यतः मानव कार्रवाई को नियंत्रित करती हैं। अतः प्रचलित प्रस्थापना यह है कि सचेत विचार सामान्यतः मानव कार्रवाई को नियंत्रित करता है।
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