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निम्नलिखित कथन किस परंपरा की ज्ञानमीमांसा का वर्णन करते हैं?

1.ज्ञान आत्मा की ही अवस्था है
2.ज्ञान दो प्रकार का है, परोक्ष (इंद्रियों के माध्यम से) और अपरोक्ष (इंद्रियों के बिना)
3.अपरोक्ष ज्ञान अवधि, मन:पर्याय और केवल में, तथा परोक्ष ज्ञान मति और श्रुत में विभाजित है
Aहिंदू धर्म
Bजैन धर्म ✓ Correct
Cबौद्ध धर्म
Dउपर्युक्त सभी
Correct answer: (B) जैन धर्म
Explanation

वर्णित ज्ञानमीमांसा जैन परंपरा की है।

यहाँ ज्ञान को आत्मा, अर्थात जीव, का स्वभाव ही माना जाता है।

यह परोक्ष, इंद्रियों के माध्यम से, और अपरोक्ष, इंद्रियों के बिना, में विभाजित है।

अपरोक्ष ज्ञान में अवधि, मन:पर्याय और केवल आते हैं।

परोक्ष ज्ञान में मति और श्रुत आते हैं।

ज्ञान का यह पाँच-भागी वर्गीकरण विशिष्ट रूप से जैन है।

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