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यदि हमारे दैनिक जीवन में अप्रिय घटनाएँ घटती हैं, तो हम तुरंत उन पर ध्यान देते हैं, किंतु अन्य सुखद बातों को नहीं देख पाते। हम इन्हें सामान्य या सहज मानकर अनुभव करते हैं। यह दर्शाता है कि करुणा और स्नेह मानव स्वभाव का अंग हैं।

करुणा अथवा प्रेम के विभिन्न स्तर होते हैं; कुछ में इच्छा या आसक्ति (attachment) का मिश्रण दूसरों की तुलना में अधिक होता है। उदाहरण के लिए, अपने बच्चों के प्रति माता-पिता के भाव में करुणा के साथ इच्छा और आसक्ति का मिश्रण रहता है। पति और पत्नी के बीच का प्रेम और करुणा, विशेषकर विवाह के आरंभ में जब वे एक-दूसरे के गहरे स्वभाव को नहीं जानते, एक सतही (superficial) स्तर पर होते हैं।

जैसे ही एक साथी का दृष्टिकोण बदलता है, दूसरे का दृष्टिकोण भी पहले जैसा था उससे विपरीत हो जाता है। इस प्रकार का प्रेम और करुणा वस्तुतः आसक्ति की प्रकृति के अधिक निकट होते हैं। आसक्ति का अर्थ है स्वयं के द्वारा प्रक्षेपित की गई निकटता की कोई भावना। वास्तव में दूसरा पक्ष अत्यंत नकारात्मक हो सकता है, परंतु अपनी मानसिक आसक्ति और प्रक्षेपण (projection) के कारण वह कुछ सुखद प्रतीत होता है।

इसके अतिरिक्त, आसक्ति व्यक्ति से किसी छोटे-से अच्छे गुण को बढ़ा-चढ़ाकर उसे शत-प्रतिशत सुंदर या शत-प्रतिशत सकारात्मक बना देती है। जैसे ही मानसिक दृष्टिकोण बदलते हैं, वह चित्र पूर्णतः बदल जाता है। अतः इस प्रकार का प्रेम और करुणा वस्तुतः आसक्ति ही है।

गद्यांश मानता है कि 'आसक्ति' (attachment) निकटता की वह भावना है जिसका प्रक्षेपण किया जाता है

Aसाथी द्वारा
Bस्वयं व्यक्ति द्वारा ✓ Correct
Cपर्यावरण द्वारा
Dपरिवार द्वारा
Correct answer: (B) स्वयं व्यक्ति द्वारा
Explanation

अनुच्छेद लगाव को स्वयं के द्वारा प्रक्षेपित निकटता की भावना के रूप में परिभाषित करता है। अतः यह निकटता व्यक्ति स्वयं (the individual themselves) द्वारा प्रक्षेपित होती है, साथी, पर्यावरण या परिवार द्वारा नहीं। उत्तर the individual themselves है।

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