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"जो इंद्रिय किसी गुण का प्रत्यक्ष करती है, वह गुणत्व तथा उस गुण के अभाव का भी प्रत्यक्ष करती है" यह कथन शास्त्रीय भारतीय दर्शन के किस संप्रदाय से जोड़ा जा सकता है?

Aलोकायत या चार्वाक
Bन्याय (Nyaya) ✓ Correct
Cबौद्ध (Buddhism)
Dउत्तर मीमांसा
Correct answer: (B) न्याय (Nyaya)
Explanation

यह सिद्धांत कि किसी गुण को ग्रहण करने वाली इंद्रिय उसकी गुणत्व तथा अभाव को भी ग्रहण करती है, न्याय (Nyaya) का है।

न्याय मानता है कि प्रत्यक्ष केवल वस्तु तक ही नहीं, अपितु उसमें समवाय गुणों तक भी पहुँचता है।

गुण के साथ उसका सामान्य स्वरूप (गुणत्व) भी गृहीत होता है।

न्याय यह भी स्वीकार करता है कि अभाव स्वयं प्रत्यक्ष का विषय है।

अतः जो इंद्रिय किसी गुण को देखती है वह यह भी देख सकती है कि वह गुण कहाँ अनुपस्थित है।

गुणों तथा अभावों को प्रत्यक्ष करने का यह यथार्थवादी विवरण न्याय संप्रदाय की विशेषता है।

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