आर्थिक विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा साठ के दशक के उत्तरार्ध से चिंता का विषय रहा है। वैश्विक पर्यावरणीय बहस को प्रायः विकसित और विकासशील देशों के बीच की बहस के रूप में देखा गया है। हरित मुद्दों पर औद्योगिक जगत के बल को विकासशील देश अनुचित हस्तक्षेप मानते हैं। किसी वैश्विक प्राधिकरण के अभाव में, अंतर्राष्ट्रीय समझौतों, संस्थाओं और व्यवस्थाओं के माध्यम से कार्यों में समन्वय का प्रयास करना पड़ता है। समस्या यह है कि औद्योगिक उत्पादन को टिकाऊ पर्यावरण के अनुरूप स्तर तक कैसे सीमित किया जाए। राज्य कर्ताओं को अपने राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध कार्य कर दूरदर्शी और टिकाऊ आर्थिक गतिविधि अपनानी होती है। वैश्विक पर्यावरण आंदोलन के प्रमुख पड़ाव पर्यावरण एवं विकास पर विश्व आयोग, रियो सम्मेलन, क्योटो प्रोटोकॉल और जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन रहे हैं। इन्होंने पर्यावरणीय स्थिरता, जैव-विविधता संरक्षण, ग्रीनहाउस गैस सांद्रता के स्थिरीकरण, और जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन एवं शमन के मुद्दों को संबोधित किया है।
ब्राजील में आयोजित सतत विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन ने निम्नलिखित में से किसे अपनाया?
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