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परिस्थितियों से विवश होकर और सफलता एवं पद-प्रतिष्ठा की खोज में शिक्षित पुरूष और महिलाएं अपने माता-पिता से बहुत दूर बस जाते हैं। कुछ व्यक्ति विदेश चले जाते हैं। माता-पिता अपने बच्चों को जिस शिक्षा को दिला पाते हैं, वही अंत में उनके विरूद्ध मोड़ ले लेती है। उनके बच्चे सुनहरे अवसरों की खोज में उन्हें अकेला छोड़ देते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ-साथ हमारी सरकार उनकी समस्याओं से परिचित है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 1999 को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन वर्ष घोषित किया हमारे देश में भी वर्ष 2000 को वृद्धजन वर्ष घोषित किया गया था।

हमारे संविधान के अनुच्छेद-41 में वृद्धजनों के हितों की देखभाल के लिए राज्य को स्पष्टत: आश्रयी बनाया गया है। समाज कल्याण मंत्रालय वृद्धजनों के कल्याण के लिए उत्तरदायी है। वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को संरक्षण देने के लिए समय-समय पर कानून बनाए जाते हैं।

उदाहरणार्थ, कानून के अंतर्गत आपराधिक दंड प्रक्रिया (सी.पी.सी) की धारा-105 के अंतर्गत कानून की सम्यक प्रक्रिया के बिना माता-पिता को घर से बेदखल नहीं किया जा सकता। माता-पिता के भरण-पोषण संबंधी अधिनियम के अंतर्गत मजिस्ट्रेट व्यक्ति को उसके वृद्ध माता-पिता के भरण-पोषण का आदेश दे सकता है। हिन्दू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम में कहा गया है कि वृद्ध माता-पिता अपने बच्चों से भरण-पोषण की मांग कर सकते हैं। घरेलू हिंसा अधिनियम में किसी भी तरह के दुर्व्यवहार से राहत पाने के लिए माता-पिता को अधिकार देने की व्यवस्था की गई है।

वर्ष 1999 को निम्नलिखित घोषित किया गया था :

Aवृद्धजनों के लिए राष्ट्रीय वर्ष
Bवृद्धजनों के लिए सार्वभौमिक वर्ष
Cवृद्धजनों के लिए अंतर्राष्ट्रीय वर्ष ✓ Correct
Dवृद्धजनों के लिए सार्क वर्ष
Correct answer: (C) वृद्धजनों के लिए अंतर्राष्ट्रीय वर्ष
Explanation

गद्यांश के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 1999 को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन वर्ष घोषित किया।

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