ओडिशा में वर्ष के दिनों जितने अनेक रंगीन मेले और उत्सव हैं। भगवान जगन्नाथ की भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर नामक दिव्य तीर्थ तक की पवित्र यात्रा रथ महोत्सव या रथ यात्रा के रूप में जानी जाती है। इस अवसर पर देवता क्रमशः नंदिघोष, तालध्वज और दर्पदलन नामक तीन रथों को सुशोभित करते हैं।
वे नौ दिनों तक दिव्य तीर्थ में रहते हैं और फिर जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। यह यात्रा बहुड़ा जात्रा कहलाती है।
ओडिशा के इस भव्य उत्सव में भारत और विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं, जो पवित्र रथों को जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक और वापस बड़दांड नामक चौड़ी सड़क पर खींचते हैं। उत्सव प्रत्येक वर्ष आषाढ़ (जून-जुलाई) माह के शुक्ल पक्ष की दूसरी तिथि से आरंभ होता है। भगवान जगन्नाथ, जिन्हें ब्रह्मांड के स्वामी के रूप में पूजा जाता है, का यह उत्सव केवल पुरी में ही नहीं बल्कि भारत और विदेश के अनेक अन्य स्थानों में भी मनाया जाता है।
रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ के साथ चलने वाले देवताओं के नाम क्या हैं?
भगवान जगन्नाथ के साथ सुभद्रा और बलभद्र चलते हैं, अतः यही उत्तर है।
गद्यांश भगवान जगन्नाथ की पवित्र यात्रा का वर्णन करता है।
यह कहता है कि वे अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ चलते हैं।
अतः साथ चलने वाले दो देवता सुभद्रा और बलभद्र हैं।
इन तीनों को भव्य रथों में निकाला जाता है।
अतः सही उत्तर सुभद्रा और बलभद्र है।
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