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सृजनात्मक समाज (creative society) की संकल्पना किसी समाज के विकास के उस चरण की ओर संकेत करती है, जिसमें बड़ी संख्या में संभावित अंतर्विरोध (contradictions) मुखर और सक्रिय हो जाते हैं।

यह सबसे अधिक तब प्रकट होता है जब उत्पीड़ित सामाजिक समूह राजनीतिक रूप से संगठित होकर अपने अधिकारों की माँग करते हैं। किसानों और जनजातियों का उभार, क्षेत्रीय स्वायत्तता और आत्म-निर्णय के आंदोलन, पर्यावरण आंदोलन, तथा विकासशील देशों में महिला आंदोलन समकालीन समय में एक सृजनात्मक समाज के उदय के संकेत हैं।

सामाजिक आंदोलनों के रूप और उनकी तीव्रता देश-देश में तथा एक ही देश के भीतर स्थान-स्थान पर भिन्न हो सकती है, किंतु किसी समाज के विविध क्षेत्रों में सामाजिक रूपांतरण (social transformation) के आंदोलनों की उपस्थिति मात्र ही किसी देश में एक सृजनात्मक समाज के उदय को दर्शाती है।

लेखक सृजनात्मक समाज से क्या तात्पर्य रखता है? नीचे दिए कोड से सही उत्तर चुनिए।

1.एक समाज जहाँ विविध कला-रूप और साहित्यिक लेखन प्रोत्साहन खोजते हैं
2.एक समाज जहाँ सामाजिक असमानताएँ एक आदर्श के रूप में स्वीकार की जाती हैं
3.एक समाज जहाँ बड़ी संख्या में अंतर्विरोध मुखर होते हैं
4.एक समाज जहाँ शोषित और उत्पीड़ित समूह अपने मानवाधिकारों और उत्थान के प्रति सचेत होते हैं
A1, 2 और 3
Bकेवल 4
Cकेवल 3 और 4 ✓ Correct
Dकेवल 2 और 4
Correct answer: (C) केवल 3 और 4
Explanation

लेखक का तात्पर्य कथन 3 और 4 से है, अतः यही उत्तर है।

सृजनात्मक समाज वह है जिसमें बड़ी संख्या में अंतर्विरोध मुखर होते हैं, जो कथन तीन है।

यह वह भी है जहाँ उत्पीड़ित अपने अधिकारों के प्रति सचेत होकर उत्थान चाहते हैं, जो कथन चार है।

कथन एक सृजनात्मक को उसके शाब्दिक, कलात्मक अर्थ में लेता है, जो इस संदर्भ में नहीं बैठता।

कथन दो गद्यांश का विरोध करता है, जो उत्पीड़ितों द्वारा अधिकार माँगने की बात करता है, असमानता स्वीकारने की नहीं।

अतः केवल कथन 3 और 4 लेखक के अर्थ को पकड़ते हैं।

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