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पुरुषों और महिलाओं को पूर्ण और वैयक्तिक मनुष्य के रूप में चित्रित किया जाना चाहिए। उन्हें उनके लिंग (सेक्स) के पारंपरिक गुणों से चित्रित नहीं किया जाना चाहिए। महिलाओं को पुरुषों की ही तरह समान व्यावहारिक, सकारात्मक और वस्तुनिष्ठ अभिवृत्तियाँ होने के रूप में दर्शाया जाना चाहिए।

इसी तरह, पुरुषों का भी अविवेकी, विषयनिष्ठ और नकारात्मक अभिवृत्तियाँ होने के रूप में प्रतिनिधित्व किया जाना चाहिए। बच्चों के चित्रण में लड़कियों को प्रायः सक्षम और यहाँ तक कि दबंग के रूप में दर्शाया जाना चाहिए। पुरुषों और महिलाओं दोनों के साथ समान सम्मान और गरिमा का व्यवहार किया जाना चाहिए।

प्रत्येक लिंग के जीर्ण पारंपरिक गुणों की समाप्त होनी चाहिए, जहाँ तक संभव हो, उनकी शारीरिक गुणों से बचना चाहिए। यौन वस्तु के रूप में महिलाओं को मानने का लैंगिक उपागम, उनके संबंध में लतीफा कहने और उनके मुद्दों पर व्यंग्य कसने से बचना चाहिए। इसी तरह पुरुषों का महिलाओं पर अत्यधिक निर्भर और उनके प्रभुत्व के अधीन होने के रूप में चित्रण और उपहास नहीं किया जाना चाहिए। लैंगिक सीमांकन द्वारा गतिविधि के विभिन्न क्षेत्रों को चित्रित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि पुरुषों और महिलाओं दोनों को सम्मिलित करना चाहिए।

लेखकों को महिलाओं की सक्षमता और प्रवीणता पर आश्चर्यचकित होकर विश्वास न करने की अभिवृत्ति से बचना चाहिए। महिलाओं को सक्रिय प्रतिभागी बताया जाना चाहिए, न कि पुरुषों के अधीन होने के रूप में। इसके अतिरिक्त, महिलाएँ पुरुषों जितनी ही प्रारंभकर्ता और प्रवर्तक हैं।

लेखक समाज में जेन्डर-समानता लाने के लिए किस कार्य को करने की कामना नहीं करता है?

Aजेन्डर-आधारित पुराने पारंपरिक गुण समाप्त होने चाहिए
Bमहिलाओं को यौन वस्तु के रूप में मानना बंद होना चाहिए
Cपुरुषों का महिलाओं पर अत्यधिक निर्भर होने के रूप में उपहास नहीं किया जाना चाहिए
Dकेवल पुरुषों को प्रारंभकर्ता के रूप में माना जाना चाहिए ✓ Correct
Correct answer: (D) केवल पुरुषों को प्रारंभकर्ता के रूप में माना जाना चाहिए
Explanation

प्रश्न पूछता है कि लेखक क्या नहीं चाहेगा। विकल्प 1, 2 और 3 सभी वे बातें हैं जिनका लेखक स्पष्ट रूप से समर्थन करता है, पुराने जेन्डर गुणों का समाप्त होना, महिलाओं को यौन वस्तु मानना बंद करना, और पुरुषों का महिलाओं पर निर्भर बताकर उपहास न करना। विकल्प 4 कहता है कि केवल पुरुषों को प्रारंभकर्ता माना जाए, पर गद्यांश जोर देता है कि महिलाएँ पुरुषों जितनी ही प्रारंभकर्ता हैं। इसलिए ठीक यही लेखक नहीं चाहता, जिससे चौथा विकल्प उत्तर बनता है।

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