नागरिक सद्गुण की उर्वर भूमि क्या है? उदार समाज के अनेक पहलू ऐसे हैं जिन्हें नागरिक सद्गुणों का संवर्धन करने वाला माना जा सकता है, जिनमें बाज़ार, नागरिक संगठन और परिवार शामिल हैं। 'न्यू राइट' के सिद्धांतकार प्रायः बाज़ार को नागरिक सद्गुण की पाठशाला के रूप में सराहते हैं। 1980 के दशक के अनेक थैचर और रीगन सुधारों का उद्देश्य लोगों के जीवन में बाज़ार के दायरे का विस्तार करना था, जो मुक्त व्यापार, विनियमन-उन्मूलन, कर-कटौती, श्रमिक संघों के दुर्बलीकरण और कल्याण-लाभों की कटौती के माध्यम से, आंशिक रूप से लोगों को पहल और आत्मनिर्भरता के सद्गुण सिखाने हेतु किया गया।
कल्याणकारी राज्य पर हाल का अधिकांश दक्षिणपंथी आक्रमण ठीक नागरिकता के संदर्भ में गढ़ा गया है। कहा गया कि कल्याणकारी राज्य गरीबों में निष्क्रियता को बढ़ावा देता है और निर्भरता की संस्कृति उत्पन्न करता है, जो नागरिकों को नौकरशाही संरक्षण के अधीन निष्क्रिय आश्रितों में बदल देती है। इसके विपरीत बाज़ार लोगों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करता है। न्यू राइट का मानना है कि आत्मनिर्भर होना न केवल अपने आप में एक महत्वपूर्ण नागरिक सद्गुण है, बल्कि समाज के पूर्ण सदस्य के रूप में स्वीकार किए जाने की एक पूर्वशर्त भी है। स्वयं का भरण-पोषण करने के दायित्व को पूरा न कर पाने के कारण दीर्घकालिक बेरोज़गार समाज के लिए तथा स्वयं के लिए भी लज्जा का स्रोत बन जाते हैं।
न्यू राइट 'आत्मनिर्भर' होने को एक नागरिक सद्गुण के रूप में निम्नलिखित में से किससे नहीं जोड़ता?
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