वैश्विक न्याय के सिद्धांतों का घोषित लक्ष्य उन मान्यताओं को सार्वभौमिक बनाना है जो संसार को एक राजनीतिक इकाई के रूप में देखती हैं। डैरल मोएलेनडोर्फ का तर्क है कि जो कारण राष्ट्र-राज्य की सीमाओं के भीतर न्याय का समर्थन करते हैं, वही कारण उन सीमाओं के पार भी न्याय का समर्थन करते हैं। दार्शनिक पीटर सिंगर ने नैतिकता के वैश्विक पहलुओं पर अपने मुख्य तर्क अपने प्रसिद्ध निबंध 'फैमिन, एफ्लुएंस एंड मोरेलिटी' में रखे। उन्होंने माना कि भुखमरी से होने वाली पीड़ा और मृत्यु, तथा बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं या आश्रय का अभाव, सीधे-सीधे बुरे हैं; और जो लोग किसी बुरी चीज़ को बिना समान नैतिक महत्व की किसी चीज़ का त्याग किए रोक सकते हैं, वे ऐसा करने के लिए नैतिक रूप से बाध्य हैं। सिंगर के लिए अजनबियों, यानी अपने पड़ोसियों से इतर लोगों, की आवश्यकताएँ भी उतनी ही नैतिक रूप से अनिवार्य हैं। अपनी बाद की पुस्तक 'वन वर्ल्ड' में सिंगर ने आगे कहा कि संसार परस्पर जुड़ा और गुँथा हुआ है, इसलिए हमें न्याय की एक अंतर-वैश्विक समझ चाहिए। थॉमस नागेल इसमें जोड़ते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक सिद्धांत में सबसे कम विवादास्पद बात यही है कि हम एक न्यायपूर्ण संसार में नहीं रहते। वैश्विक गरीबी, कुपोषण और उससे जुड़ी मृत्यु से निपटने के सबसे प्रभावी तरीकों पर भले मतभेद हो, पर अति-आवश्यकता में पड़े लोगों के लिए किसी न किसी रूप में मानवीय सहायता स्पष्ट रूप से अपेक्षित है।
गद्यांश में किसे 'बुरा' नहीं कहा गया है?
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