पर्यावरणीय संकटों से संबंधित जोखिम-आकलन (risk assessment) में चरणों का सही अनुक्रम क्या है?
1.जोखिम-चरित्रांकन
2.अनावरण-आकलन (exposure assessment)
3.संकट-पहचान (hazard identification)
4.जोखिम-प्रबंधन
A3, 2, 1, 4 ✓ Correct
B3, 1, 2, 4
C1, 3, 2, 4
D2, 3, 4, 1
Correct answer: (A) 3, 2, 1, 4
Explanation
संकट-पहचान (कथन 3) पहला चरण है, जिसमें पहचाना जाता है कि कौन-सा कारक हानि पहुँचा सकता है।
अनावरण-आकलन (कथन 2) इसके बाद आता है, जिसमें अनुमान लगाया जाता है कि लोग या पारिस्थितिकी तंत्र कितने संपर्क में आते हैं।
जोखिम-चरित्रांकन (कथन 1) फिर संकट और अनावरण को मिलाकर हानि की प्रायिकता और गंभीरता बताता है।
जोखिम-प्रबंधन (कथन 4) अंतिम चरण है, जिसमें जोखिम घटाने हेतु नियंत्रण चुने जाते हैं।
क्रम 3, 2, 1, 4 इस तार्किक प्रवाह को बनाए रखता है, प्रबंधन या चरित्रांकन से शुरू होने वाले क्रमों के विपरीत।
यह चरणबद्ध ढाँचा अधिकांश पर्यावरणीय और जन-स्वास्थ्य नियमन का आधार है।
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