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भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे की सत्यनिष्ठा बहुत हद तक इसकी निर्वाचन प्रक्रिया (Electoral Process) पर निर्भर करती है, जिसका प्रबंधन और पर्यवेक्षण भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India, ECI) द्वारा किया जाता है। ECI एक स्वायत्त संवैधानिक निकाय है जिसे निर्वाचनों के संचालन (Conduct of Elections) की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। इसका अधिदेश संसद, राज्य विधानमंडलों, तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों को समाविष्ट करता है। संपूर्ण प्रक्रिया नियमों के एक व्यापक समुच्चय द्वारा शासित होती है, जिसमें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) सम्मिलित है, जो निर्वाचक नामावली तैयार करने, मतदान के संचालन और परिणामों की घोषणा की प्रक्रियाओं को रेखांकित करता है। ECI की भूमिका का एक प्रमुख अंग आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) का प्रवर्तन है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने हेतु दिशानिर्देशों का समुच्चय है। प्रणाली की सुदृढ़ता के बावजूद, निर्वाचन प्रक्रिया निरंतर मूल्यांकन के अधीन है, जिससे निर्वाचन सुधारों (Electoral Reforms) की एक सतत माँग उठती है। इन सुधारों का उद्देश्य धन और बाहुबल के प्रभाव, राजनीति के अपराधीकरण, तथा मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापनीयता में सुधार जैसी लगातार बनी रहने वाली चुनौतियों का समाधान करना है। सुधारों पर बहस भारतीय राज्य की लोकतांत्रिक साख को उसकी सबसे मूलभूत प्रक्रिया को परिष्कृत करके सुदृढ़ करने के एक सतत प्रयास को दर्शाती है।

पाठ में उल्लिखित निर्वाचनों के संचालन हेतु निर्वाचन आयोग के अधिदेश में निम्नलिखित में से कौन-सा नहीं आता?

Aसंसद के निर्वाचन।
Bस्थानीय निकाय संस्थाओं के निर्वाचन।
Cराज्य विधानमंडलों के निर्वाचन।
Dराष्ट्रपति के पद के निर्वाचन।
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