सामाजिक आंदोलन को समय के साथ निरंतर चलने वाली सामूहिक क्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है। ऐसी क्रिया प्रायः राज्य के विरुद्ध निर्देशित होती है और राज्य की नीति या व्यवहार में परिवर्तन की माँग का रूप लेती है। सामूहिक क्रिया में किसी न किसी सीमा तक संगठन होना आवश्यक है। इस संगठन में एक नेतृत्व और एक संरचना सम्मिलित हो सकती है, जो यह निर्धारित करती है कि सदस्य परस्पर किस प्रकार जुड़ते हैं, निर्णय लेते हैं और उन्हें कार्यान्वित करते हैं। सामाजिक आंदोलन में भाग लेने वाले समान उद्देश्य और समान विचारधारा साझा करते हैं। सामाजिक आंदोलन का सामान्य अभिविन्यास अपने जीवन-काल में परिवर्तन लाने या रोकने का होता है। सामाजिक आंदोलन के महत्वपूर्ण घटक होते हैं; वे परस्पर निर्भर होते हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। आंदोलन का उद्देश्य संकीर्ण, विशिष्ट मुद्दों से बदलकर सामाजिक रूपांतरण के व्यापक लक्ष्यों की ओर बढ़ता है। विचारधारा रणनीतियों और कार्यक्रमों के विकास को दिशा देती है और सामूहिकता की भावना विकसित कर सहभागियों को एकजुट भी रखती है। लोगों को संगठित करने के लिए विविध रणनीतियाँ और कार्यक्रम विकसित किए जाते हैं। नेतृत्व, जो आंदोलन की वृद्धि के क्रम में आरंभ होता है या उभरता है, विचारधाराओं और उद्देश्यों को व्यक्त करने तथा सहभागियों की भावना बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
सामाजिक आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
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