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मानवशास्त्रियों ने युद्ध की सार्वभौमिक व्याख्याओं पर प्रश्न उठाए हैं। कुछ यह आशा रखते हैं कि दासता की भाँति युद्ध को भी बुद्धिमत्तापूर्ण सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया द्वारा समाप्त किया जा सकता है। किंतु युद्ध इतना विविध एवं ऐतिहासिक रूप से व्यापक है कि इसे सरल उपायों से ठीक नहीं किया जा सकता।

आर्थिक उद्देश्य सदैव विद्यमान रहे हैं। नमक अथवा धातुओं, स्वर्ण एवं कोष, दास-श्रम अथवा व्यापार मार्गों तक पहुँच, अथवा तेल तथा अन्य संसाधनों के लिए संघर्ष ने विश्व के अनेक हिंसक द्वंद्वों को चिन्हित किया है। किंतु वैचारिक एवं धार्मिक टकरावों ने भी युद्ध को प्रेरित किया है।

सिकंदर से नेपोलियन तथा हिटलर तक अहंकारपूर्ण युद्ध आधिपत्य स्थापित करने के लिए थे। चीनी शक्ति के उदय ने यह प्रश्न उठाया है कि क्या अमेरिका के साथ संभावित द्वंद्व युद्ध में परिणत होगा।

सुरक्षा की खोज प्रत्येक युद्धकालीन प्रसंग में पाई जा सकती है, क्योंकि सीमाएँ नाजुक प्रतीत होती हैं। क्या युद्ध का ह्रास हो रहा है, जबकि द्वंद्व सुलझाने के नए रूप, साइबर-आक्रमण, तनाव तथा मान्यताओं के टकराव उभरती अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में अत्यंत स्पष्ट दिखाई देते हैं। और इस प्रकार, युद्ध का भविष्य अपने अतीत से बहुत भिन्न प्रतीत नहीं हो सकता।

अलेक्ज़ेंडर, नेपोलियन और हिटलर जैसे नेताओं द्वारा प्रभुत्व स्थापित करने हेतु किए गए युद्ध को वर्णित करने हेतु निम्नलिखित में से किस पद का उपयोग किया गया है?

Aसंसाधन युद्ध
Bरक्षात्मक युद्ध
Cदंभी युद्ध (Hubristic Warfare) ✓ Correct
Dक्रांतिकारी युद्ध
Correct answer: (C) दंभी युद्ध (Hubristic Warfare)
Explanation

प्रयुक्त पद दंभी युद्ध है, अतः यही उत्तर है।

पाठ अलेक्ज़ेंडर, नेपोलियन और हिटलर का एक साथ उल्लेख करता है।

यह कहता है कि उनके युद्ध प्रभुत्व स्थापित करने हेतु थे।

यह इस प्रेरणा को दंभी युद्ध कहता है।

अन्य पद इस विचार हेतु पाठ में नहीं आते।

अतः दंभी युद्ध सही है।

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