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1958 से 1960 तक चीन में हुए अकाल में अनुमानतः लगभग 25 मिलियन लोग मारे गए। इसीलिए इसे एक राजनीतिक अपराध तथा एक वैचारिक अपराध कहा गया है, जिसकी सर्वाधिक विस्तृत विवेचना अमर्त्य सेन ने की।

यह उनके कार्य का वह भाग है जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। अमर्त्य सेन एक अर्थशास्त्री हैं जिन्होंने वैध कारणों से इसे एक वैचारिक अपराध माना। उन्होंने कहा कि यह आशय (intent) का विषय नहीं था; वे किसी को मारना नहीं चाहते थे।

बात केवल इतनी है कि वैचारिक संस्थाएँ ऐसी थीं कि यह घटित हुआ। चीन एक अधिनायकवादी राज्य था, जहाँ जो कुछ हो रहा था उसकी सूचना केंद्रीय सरकार तक नहीं पहुँच रही थी। वे कोई कार्रवाई नहीं कर सके, क्योंकि अधिनायकवादी राज्य में ऐसा ही होता है।

अतः यह अधिनायकवादी संस्थाओं का प्रतिबिंब है। यह एक बड़ा नरसंहार था, इसके पीछे कोई आशय नहीं था।

चीन के अकाल पर विस्तार से किसने चर्चा की और इसे एक वैचारिक अपराध माना?

Aकार्ल मार्क्स
Bअमर्त्य सेन ✓ Correct
Cनोम चॉम्स्की
Dटी. एस. एलियट
Correct answer: (B) अमर्त्य सेन
Explanation

अमर्त्य सेन ने इस पर विस्तार से चर्चा की, अतः यही उत्तर है।

गद्यांश यह विश्लेषण उन्हें देता है।

यह बताता है कि इस कार्य से उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला।

उन्होंने अकाल को एक वैचारिक अपराध कहा।

अन्य नाम यहाँ श्रेय नहीं पाते।

अतः अमर्त्य सेन सही है।

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