मुझे यह निश्चित प्रतीत होता है कि धार्मिक संघर्ष की समस्या का हिंदू समाधान भविष्य में स्वीकार किए जाने की संभावना है। इसे प्राप्त करने हेतु अपने प्रयोजन और पथ को स्वयं निर्धारित करने की स्वतंत्रता का बोध अत्यंत महत्वपूर्ण है। जो निश्चय स्वयं-निर्धारित नहीं है, उसका कोई मूल्य नहीं। विश्व के प्रत्येक भाग में विभिन्न धर्म धीरे-धीरे एक-दूसरे को मित्रता में गले लगाना सीख रहे हैं। आज संध्या यहाँ मेरी उपस्थिति इसी का संकेत है। धर्म संसद और सभी मतों के उदार विचारकों के सम्मेलन पारस्परिक समझ और सद्भाव को बढ़ावा देते हैं। तुलनात्मक धर्म का अध्ययन अन्य धर्मों के प्रति निष्पक्ष दृष्टिकोण विकसित कर रहा है। हमारा कर्तव्य है कि हम जनता की प्रज्ञा, युग की भावना और समय की आवश्यकताओं के अनुसार प्रत्येक धर्म पर बल देते हुए सभी धर्मों की मूलभूत एकता को प्रतिबिंबित करें। हम धर्मों के पारस्परिक संबंध पर स्पष्ट रूप से सोचना सीख रहे हैं।
'मुझे उस राष्ट्र का होने पर गर्व है जिसने पृथ्वी के सभी धर्मों के उत्पीड़ितों और सभी राष्ट्रों के शरणार्थियों को आश्रय दिया' यह किसने कहा?
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