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सृजनात्मक समाज (creative society) की संकल्पना किसी समाज के विकास के उस चरण की ओर संकेत करती है, जिसमें बड़ी संख्या में संभावित अंतर्विरोध (contradictions) मुखर और सक्रिय हो जाते हैं।

यह सबसे अधिक तब प्रकट होता है जब उत्पीड़ित सामाजिक समूह राजनीतिक रूप से संगठित होकर अपने अधिकारों की माँग करते हैं। किसानों और जनजातियों का उभार, क्षेत्रीय स्वायत्तता और आत्म-निर्णय के आंदोलन, पर्यावरण आंदोलन, तथा विकासशील देशों में महिला आंदोलन समकालीन समय में एक सृजनात्मक समाज के उदय के संकेत हैं।

सामाजिक आंदोलनों के रूप और उनकी तीव्रता देश-देश में तथा एक ही देश के भीतर स्थान-स्थान पर भिन्न हो सकती है, किंतु किसी समाज के विविध क्षेत्रों में सामाजिक रूपांतरण (social transformation) के आंदोलनों की उपस्थिति मात्र ही किसी देश में एक सृजनात्मक समाज के उदय को दर्शाती है।

गद्यांश के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। ऊपर दिए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Statement I:सृजनात्मक समाज होने के लिए विविध सामाजिक आंदोलनों का होना अनिवार्य है
Statement II:सृजनात्मक समाज होने के लिए संभावित अंतर्विरोधों और संघर्षों का होना अपरिहार्य है
Aकेवल 1
Bकेवल 2
C1 और 2 दोनों
Dन तो 1 और न ही 2 ✓ Correct
Correct answer: (D) न तो 1 और न ही 2
Explanation

कोई भी कथन सही नहीं है, अतः यही उत्तर है।

दोनों कथन गद्यांश में वस्तुतः दिए तर्क को उलट देते हैं।

कथन एक गलत है, क्योंकि गद्यांश आंदोलनों की विविधता को कभी आवश्यक शर्त नहीं बनाता।

गद्यांश कहता है कि ऐसे आंदोलनों की उपस्थिति मात्र ही एक सृजनात्मक समाज को दर्शाती है।

कथन दो गलत है, क्योंकि केवल अंतर्विरोध पर्याप्त नहीं; उन्हें मुखर और सक्रिय भी होना चाहिए।

अतः न तो I और न ही II सही है।

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