Paper 1 · Comprehension
UGC NET 27 June 2025 Shift 2
Passage
एक व्यक्ति जो अपने स्वयं के विचारों और मतों के निर्माण का कष्ट उठाता है, वह ऐसा अनुभव करेगा कि उसके निष्कर्षों के लिए बहुसंख्यक मत के प्रति उसका कोई उत्तरदायित्व नहीं है। यदि वह सत्य का यथार्थ प्रेमी है, यदि वह घटनाओं/बातों/वस्तुओं को उसी प्रकार से देखने जैसी वे हैं और तथ्यों के अनुरूप न होने वाले विचारों के धारण के प्रति असंगतता/विद्वेष से प्रेरित है, तो वह पूर्ण रूप से अपने चारों ओर के लोगों की सहमति से मुक्त होगा। जब वह जीवन के व्यावहारिक आचरण में अपने मतों के अनुप्रयोग के लिए अग्रसर होता है, तो स्थिति भिन्न होती है। तब इसके अच्छे कारण होते हैं कि उसका आचार व्यवहार क्यों कम कठोर होना चाहिए। वह जिस समाज में है वह प्राचीन और संयुक्त विकास है। वे लोग जिनसे वह असहमति में है, उनके विचार और परंपरायें केवल संयोग से नहीं प्राप्त हुए हैं।
इन विचारों और परंपराओं, सभी का मूल एक निश्चित वास्तविक अनुमानित क्षमता (फिटनेस) में है। उनकी वर्तमान पीढ़ी के एक अंश के जीवनों में कुछ निश्चित गहराई तक मूल पर पकड़ है। एक दूसरे के साथ उनकी अनुरूपता अब समाप्त हो गई हो सकती है। यह सत्य का मात्र एक पक्ष है। सर्वाधिक उत्साहपूर्ण प्रचारबाज़ी उनमें व्याप्त नहीं हो सकती। सामान्य भाषा में, हम एक पीढ़ी का कुछ ऐसे के रूप में उल्लेख करते हैं जिसमें इसके सभी अंग और सदस्य सजातीय होने के साथ सच्ची एकता का एक प्रकार होते हैं। फिर भी, यह मात्र ऐसा नहीं है। यह समग्र है किंतु समग्र निरंतर परिवर्तन में है, इसके कारक और तत्व आंतरिक रूप से बदल रहे हैं। यह एक नहीं, बल्कि कई पीढ़ियाँ हैं।
लेखक के अनुसार, आत्म विचारित व्यक्ति का आचार व्यवहार व्यावहारिक सामाजिक जीवन में होना चाहिए।
Aलचीला ✓ Correct
Bकठोर
Cउदासीन/तटस्थ
Dअग्र-सक्रिय
Answer: A
Explanation
★गद्यांश कहता है कि व्यावहारिक आचरण में उसका आचार कम कठोर होने के अच्छे कारण होते हैं।
★कम कठोर होने का अर्थ लचीला होना है, अतः व्यावहारिक सामाजिक जीवन में आचार व्यवहार लचीला होना चाहिए।
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