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The maximum control over the means of production is under

Paper 1 · Comprehension UGC NET 25th June 2025 Shift 1
Passage
समाज की पूंजीवादी व्यवस्था मनुष्यों के बीच स्वस्थ संबंधों का पोषण नहीं करती है। बहुत थोड़े लोग उत्पादन के सभी साधनों के स्वामी होते हैं और अन्य, यद्यपि नाम मात्र के लिए कुछ को स्वयं पर थोपी गई शर्तों के अधीन अपनी श्रम शक्ति को बेचना पड़ता है। चूँकि पूंजीवाद का जोर भौतिक संपदा के सर्वोच्च महत्त्व पर होता है इसलिए इसकी अपील की तीव्रता अर्जनशील तीव्रता की ओर होती है। यह आर्थिक शक्ति की उपासना को बढ़ावा देती है और इसके अर्जन के लिए नियोजित साधनों पर कोई ध्यान नहीं देती है और यह लक्ष्य पूर्ति को बढ़ावा देती है। मानवीय सहन शीलता की चरम सीमा तक मनुष्यों के इसके शोषण से, इसका संकेन्द्रण अधिकतम उत्पादन पर न होकर सर्वाधिक मुनाफे पर होता है। अत: मानव परिवार का विभाजन आर्थिक स्थिति के आधार पर किया जाता है। यह सब मानवीय गरिमा के विभाजन के लिए हानिकारक है। और जब उत्पीड़ित निर्धन सहायता के लिए धर्म के संस्थापकों की ओर मुड़ता है, तो वे स्थापित व्यवस्था का चालाकी पूर्वक बचाव करते हैं। वे उनके वर्तमान दुखों के लिए भावी सुखों का वचन देते हैं और संतप्त मनुष्यों के दुःख व विद्रोह पर मरहम लगा कर संतुलन बनाए रखने हेतु स्वर्ग का मायाजाल बुनते हैं। व्यवस्था अन्याय थोपती है और धर्म उसे उचित ठहराता है।
उत्पादन के साधनों पर अधिकतम नियंत्रण निम्न में से किसके अधीन होता है?
Aसमस्त हितधारक
Bसर्वहारा वर्ग
Cव्यवस्था के स्वामी ✓ Correct
Dश्रमिक वर्ग
Answer: C
Explanation
गद्यांश कहता है कि बहुत थोड़े लोग उत्पादन के सभी साधनों के स्वामी हैं जबकि शेष को अपना श्रम बेचना पड़ता है। इसलिए नियंत्रण व्यवस्था के स्वामियों के पास है, न कि श्रमिकों या सामान्य हितधारकों के पास।

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