Paper 1 · Comprehension
UGC NET 2025 DEC Human Rights and Duties
Passage
विधि हेतु धर्म पद का प्रयोग, तथापि, न तो सार्विक था न ही अपरिहार्य। यह प्रथम शताब्दी सी ई के लेखक कौटिल्य के संग्रह ट्रीटाइज ऑन पॉलिटिक्स (अर्थशास्त्र) से सिद्ध होता है। भारत में विधि के इतिहास हेतु कौटिल्य की कृति का महत्व प्रथमतः इस तथ्य पर आधारित है कि यह उस इतिहास में एक भिन्न तथा कई मायनों में एक अनुपम दृष्टि प्रदान करती है। उनकी पुस्तक एक भिन्न शास्त्रीय परंपरा से संबंधित है जिसकी सामाजिक और राजनीतिक प्राथमिकताएँ ब्राह्मणी शास्त्रीय परंपरा के भीतर न्यायशास्त्रीय चिंतन को समर्पित प्राथमिक विषय धर्म के विज्ञान (धर्मशास्त्र) से भिन्न हैं। कौटिल्य समाज के भीतर विधियों की विविधता को धर्म की एकल श्रेणी में घटाने का कोई प्रयास नहीं करते। वास्तव में अर्थशास्त्र में हमें एक भी ऐसा सर्वांगसम पद नहीं मिलता जो स्वयं विधि की ओर, अथवा धर्म के विज्ञान के विमर्श में धर्म पद द्वारा आच्छादित धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष मानकों के व्यापक क्षेत्रों की ओर संकेत करता हो। तथापि यह स्पष्ट है कि कौटिल्य प्रत्यक्षतः तथा इतरोक्ति में विधि की बहुलता का पक्ष लेते हैं; विधि एक नहीं बल्कि बहुल है। यद्यपि उनकी कृति धर्म के विज्ञान के आरंभिक प्रलेखों की तुलना में बाद की है, तथापि यह एक वैकल्पिक बौद्धिक इतिहास को खँगालती है जो संभवतः धर्म के विज्ञान द्वारा प्रदर्शित इतिहास के समांतर चलता था।
ब्राह्मणी शास्त्रीय परंपरा के अनुसार निम्नलिखित में से कौन मुख्यतः न्यायशास्त्रीय चिंतन से संबंधित है?
Aअर्थशास्त्र
Bनीतिशास्त्र
Cधर्मशास्त्र ✓ Correct
Dट्रीटाइज ऑन पॉलिटिक्स
Answer: C
Explanation. गद्यांश धर्म के विज्ञान अर्थात धर्मशास्त्र को ब्राह्मणी शास्त्रीय परंपरा के भीतर न्यायशास्त्रीय चिंतन को समर्पित प्राथमिक विषय बताता है। अर्थशास्त्र अथवा ट्रीटाइज ऑन पॉलिटिक्स एक भिन्न परंपरा से संबंधित है, अतः उत्तर धर्मशास्त्र है।
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