प्राचीन भारतीय ग्रंथों के अनुसार, आंतरिक और बाह्य दोनों संचार का अंतिम लक्ष्य है
Aसामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करना
Bराजनीतिक शक्ति पर अधिकार करना
Cआत्म-साक्षात्कार (self-realization) ✓ Correct
Dधन का संचय
Correct answer: (C) आत्म-साक्षात्कार (self-realization)
Explanation
प्राचीन भारतीय ग्रंथों के अनुसार आंतरिक और बाह्य दोनों संचार का अंतिम लक्ष्य आत्म-साक्षात्कार है।
स्वयं से आंतरिक संचार और दूसरों से बाह्य संचार अपने सच्चे स्वरूप को जानने की सीढ़ियाँ माने जाते हैं।
यहाँ संचार केवल सूचना का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधन है।
सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करना संचार को प्रतिष्ठा की सीढ़ी मानता है, जो सांसारिक लक्ष्य है, अंतिम नहीं।
राजनीतिक शक्ति पर अधिकार करना संचार को आंतरिक उपलब्धि के बजाय प्रभुत्व का उपकरण बना देता है।
धन का संचय इसे भौतिक लाभ की सेवा में लगाता है, जो इन ग्रंथों में सर्वोच्च माने आत्म-साक्षात्कार से बहुत दूर है।
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